यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पद से 9 अप्रैल 2025 को इस्तीफा दे दिया, जिसकी जानकारी 10 अप्रैल को सामने आई।
14 मार्च 2025 को उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने के दौरान ₹500 के नोटों के जले हुए बंडल मिलने से विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद उनका ट्रांसफर दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया, जहां 5 अप्रैल को शपथ लेने के बावजूद उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं दिया गया।
Supreme Court of India की जांच समिति ने उन्हें आरोपों में दोषी पाया था। साथ ही, उनके खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव भी लाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकसभा स्पीकर को जांच समिति बनाने का अधिकार है, भले ही राज्यसभा में प्रस्ताव पारित न हुआ हो।
आखिरकार, विवादों के बीच जस्टिस वर्मा ने पद से इस्तीफा दे दिया।
