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September 8, 2026
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चिनाब पुल की ऊंचाई में छुपा है भिलाई स्टील का मजबूत इरादा

जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों पर लहराती चिनाब नदी अब इतिहास में दर्ज हो चुकी है — उस पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया। इस अतुलनीय इंजीनियरिंग चमत्कार के पीछे जो ताकत है, वो है स्टील — और वो स्टील आया है हमारे अपने भिलाई इस्पात संयंत्र से।

इस पुल की ऊंचाई एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ज्यादा है और यह 359 मीटर की ऊंचाई से नदी को पार करता है। कुल 1.3 किलोमीटर लंबा यह पुल भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे परियोजना — उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक — का हिस्सा है।

भिलाई की 12,432 टन स्टील से बना इतिहास

इस ऐतिहासिक पुल के निर्माण में सेल की अहम भूमिका रही। सेल के विभिन्न संयंत्रों ने मिलकर 16,000 टन स्टील दिया, जिसमें अकेले भिलाई से 12,432 टन स्टील भेजा गया। इनमें 5922 टन टीएमटी बार, 6454 टन प्लेट्स, और 56 टन स्ट्रक्चरल स्टील शामिल हैं।

अन्य संयंत्र जैसे बर्नपुर, राउरकेला, दुर्गापुर और बोकारो ने भी इसमें योगदान दिया, जिससे यह परियोजना समय पर और सटीकता से पूरी हो सकी।

क्या है इस पुल की खासियत?

266 किमी/घंटा की हवा भी नहीं हिला सकती इस पुल को

तेज भूकंपों का सामना करने की क्षमता

84 किलोमीटर रॉक बोल्ट और केबल एंकर का इस्तेमाल

10 लाख क्यूबिक मीटर अर्थवर्क और 66,000 क्यूबिक मीटर कंक्रीट का उपयोग

हर मौसम में काम करेगा यह पुल, कश्मीर के आवागमन को आसान बनाएगा

सेल का स्टील अब हर ऐतिहासिक परियोजना का हिस्सा

चिनाब पुल से पहले भी भिलाई इस्पात संयंत्र ने देश की कई मेगाप्रोजेक्ट्स में अपनी छाप छोड़ी है:

बांद्रा-वर्ली सी लिंक, अटल सेतु

अटल सुरंग, सेला सुरंग

सेंट्रल विस्टा, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट

आईएनएस विक्रांत, युद्धपोत निर्माण

 

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