नई दिल्ली, 6 जून 2025: एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में इंटरनेट की दुनिया में तहलका मचाने को तैयार है। टेलीकॉम मंत्रालय ने स्टारलिंक को सैटेलाइट आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह सेवा ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी का नया दौर शुरू कर सकती है। खास बात यह है कि स्टारलिंक मात्र ₹840 प्रति माह में अनलिमिटेड डेटा ऑफर करेगी, जो इसे भारत के आम यूजर्स के लिए किफायती बनाएगा।
कैसे मिली मंजूरी?
स्पेसएक्स की स्टारलिंक को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) से लेटर ऑफ इंटेंट मिल चुका है। अब भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) से अंतिम मंजूरी का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक, अगले 15-20 दिनों में स्टारलिंक को ट्रायल स्पेक्ट्रम आवंटित हो सकता है, जिसके बाद सेवा शुरू होगी।
क्या खास है स्टारलिंक में?
स्टारलिंक का नेटवर्क 7,000 से ज्यादा लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स पर आधारित है, जो पारंपरिक फाइबर या मोबाइल टावरों की जरूरत खत्म करता है। यह सेवा 50 से 250 एमबीपीएस की स्पीड और 20-40 एमएस की कम लेटेंसी देती है। लद्दाख, अरुणाचल, हिमाचल जैसे पहाड़ी इलाकों और अंडमान-निकोबार जैसे द्वीपों में यह इंटरनेट क्रांति ला सकती है। चाहे ऑनलाइन क्लास हो, टेलीमेडिसिन हो या वीडियो स्ट्रीमिंग, स्टारलिंक हर जरूरत को पूरा करने का वादा करती है।
कितना होगा खर्च?
स्टारलिंक की शुरुआती कीमत ₹840 प्रति माह होगी, जिसमें अनलिमिटेड डेटा मिलेगा। लेकिन, यूजर्स को सैटेलाइट डिश, राउटर और केबल्स वाली स्टारलिंक किट खरीदने के लिए ₹21,300 से ₹32,400 का एकमुश्त खर्च करना होगा। यह कीमत पश्चिमी देशों (₹8,000-₹10,000 प्रति माह) की तुलना में काफी कम है। हालांकि, TRAI ने शहरी यूजर्स के लिए ₹500 मासिक शुल्क और 8% लाइसेंस फीस जैसे नियम लागू किए हैं, जो लागत को थोड़ा बढ़ा सकते हैं।
कौन देगा टक्कर?
भारत में स्टारलिंक का मुकाबला रिलायंस जियो-एसईएस, भारती की यूरोसैट वनवेब और ग्लोबलस्टार से होगा। लेकिन मस्क की कंपनी की तकनीक और किफायती दाम इसे बाजी मारने का मौका दे सकते हैं। स्टारलिंक का लक्ष्य 1 करोड़ यूजर्स तक पहुंचना है, हालांकि सैटेलाइट कवरेज की कमी के कारण 2030 तक यह 15 लाख यूजर्स को ही सेवा दे पाएगी।
ग्रामीण भारत के लिए उम्मीद की किरण:
यह सेवा उन लाखों लोगों के लिए वरदान साबित होगी, जहां मोबाइल टावर या फाइबर लाइन नहीं पहुंची। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, ई-कॉमर्स और आपदा प्रबंधन में स्टारलिंक डिजिटल इंडिया मिशन को नई रफ्तार देगी। खासकर, नॉर्थ-ईस्ट और हिमालयी क्षेत्रों में यह तकनीक गेम-चेंजर होगी।
