April 16, 2026
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टैक्सपेयर्स को डबल राहत: आयकर विभाग का TAXASSIST लॉन्च, ITR फाइलिंग की डेडलाइन अब 15 सितंबर

नई दिल्ली: आयकर विभाग ने करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहला, TAXASSIST नामक एक नई पहल शुरू की गई है, जो करदाताओं को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग, नोटिस का जवाब देने और कर-संबंधी सवालों में मदद करेगी। दूसरा, वित्तीय वर्ष 2024-25 (आकलन वर्ष 2025-26) के लिए ITR फाइलिंग की समयसीमा को 31 जुलाई 2025 से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दिया गया है। यह फैसला नए ITR फॉर्म्स में बड़े बदलावों और सिस्टम अपग्रेड की जरूरतों को देखते हुए लिया गया है।

TAXASSIST क्या है?
TAXASSIST आयकर विभाग की एक नई सहायता सेवा है, जो करदाताओं को रिटर्न फाइलिंग, नोटिस का जवाब देने और कर नियमों को समझने में सहायता प्रदान करेगी। यह सेवा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो गलत दावे (जैसे धारा 80GGC के तहत गलत कटौती) करते हैं। TAXASSIST के जरिए विभाग करदाताओं को ईमेल या SMS के माध्यम से समयसीमा और महत्वपूर्ण कर कार्यों की याद दिलाएगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई करदाता गलत दान का दावा करता है, तो उसे रिटर्न संशोधन या अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करने की सलाह दी जाएगी। विभाग ने साफ किया है कि TAXASSIST नोटिस को नजरअंदाज करने पर जांच या जुर्माना लग सकता है।

समयसीमा क्यों बढ़ी?
आयकर विभाग ने ITR फॉर्म्स में व्यापक बदलाव किए हैं, जिनमें पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन्स) की गणना, TDS कोड और शेयर बायबैक से होने वाली आय की रिपोर्टिंग शामिल है। इन बदलावों के लिए ई-फाइलिंग यूटिलिटीज (जैसे JSON और Excel) को अपडेट करने में समय लग रहा है। साथ ही, TDS स्टेटमेंट्स 31 मई 2025 तक दाखिल होने के बाद जून से क्रेडिट्स का रिफ्लेक्शन शुरू होगा, जिससे फाइलिंग के लिए समय कम पड़ता है। इसलिए, गैर-ऑडिट करदाताओं (जैसे वेतनभोगी, NRI, पेंशनर्स) के लिए समयसीमा को 15 सितंबर 2025 तक बढ़ाया गया है। ऑडिट वाले मामलों की डेडलाइन 31 अक्टूबर 2025 ही रहेगी।

करदाताओं को क्या फायदा?

  • अधिक समय: 46 दिन की अतिरिक्त समयसीमा से करदाता बिना हड़बड़ी के AIS और 26AS डेटा के साथ मिलान कर सकेंगे, जिससे त्रुटियां कम होंगी।

  • ज्यादा ब्याज: रिफंड पर धारा 244A के तहत 0.5% मासिक ब्याज (6% वार्षिक) मिलता है। समयसीमा बढ़ने से रिफंड में 33% तक ज्यादा ब्याज मिल सकता है।

  • TAXASSIST का सपोर्ट: यह सेवा गलत दावों को सुधारने और नोटिस का जवाब देने में मदद करेगी, जिससे जांच का डर कम होगा।

सावधानियां:

  • लेट फीस: अगर ITR 15 सितंबर 2025 तक फाइल नहीं होता, तो बेलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर 2025 तक दाखिल किया जा सकता है, लेकिन ₹5,000 (₹5 लाख से कम आय वालों के लिए ₹1,000) की लेट फीस और धारा 234A के तहत 1% मासिक ब्याज देना होगा।

  • नुकसान की सीमा: देर से फाइलिंग करने पर नुकसान को अगले साल ले जाने की सुविधा खत्म हो सकती है, और पुराना टैक्स रिजीम चुनने का विकल्प भी नहीं मिलेगा।

  • TAXASSIST नोटिस: इन नोटिस को गंभीरता से लें, क्योंकि इन्हें नजरअंदाज करने पर जांच या दंड हो सकता है।

करदाताओं के लिए सुझाव:

  1. जल्दी फाइल करें: रिफंड जल्द पाने और तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए जल्दी रिटर्न दाखिल करें।

  2. सही फॉर्म चुनें: ITR-1 और ITR-4 की Excel यूटिलिटीज 30 मई 2025 को जारी हो चुकी हैं। सही फॉर्म और टैक्स रिजीम (पुराना या नया) का चयन करें।

  3. दस्तावेज तैयार रखें: वैध दान रसीदें, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेज तैयार रखें, खासकर TAXASSIST के नोटिस का जवाब देने के लिए।

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