September 5, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“ट्रस्ट की आड़ में जमीनी खेल: जैतूसाव मठ की करोड़ों की संपत्ति बेचने का फर्जीवाड़ा उजागर”

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों की हेराफेरी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला जैतूसाव मठ की करोड़ों की जमीन के फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जहां ट्रस्टियों द्वारा भगवान के नाम पर पवित्र भूमि को निजी लाभ के लिए बेच दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम:

17 जून 2025 को रायपुर से सामने आई इस खबर ने सनसनी फैला दी। ठाकुर रामचंद्र स्वामी जैतूसाव मठ की जमीनों को, जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी ट्रस्टियों के पास थी, धोखाधड़ी कर बेचा गया। राजधानी के आसपास के कई इलाकों जैसे दतरेंगा, भटगांव, भरेंगा, सेजबहार और धर्मपुरा में मठ की सैकड़ों एकड़ भूमि थी जिसे ट्रस्टियों ने निजी रसूखदारों को सौंप दिया।

ट्रस्टियों की भूमिका:

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन ट्रस्टियों पर भगवान की संपत्ति की रक्षा का जिम्मा था, वही लोग अब इस संपत्ति को निजी बिल्डरों और कारोबारियों को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। दतरेंगा में ही 17 एकड़ जमीन को बिल्डर अविनाशगुप के नाम बेच दिया गया।

प्रशासनिक हस्तक्षेप:

मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर ने हस्तक्षेप करते हुए रजिस्ट्री प्रक्रिया को शून्य करने का आदेश जारी किया है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रशासन अब इस गड़बड़ी को गंभीरता से ले रहा है।

 

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