केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आगामी 8 अगस्त को सीतामढ़ी दौरा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी है। इस दिन वह पुनौरा धाम में जानकी मंदिर के भव्य निर्माण कार्य की आधारशिला रखेंगे, जिसे NDA द्वारा मिशन 2025 के आग़ाज़ के रूप में देखा जा रहा है।
🔸 धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव
पुनौरा धाम को माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है, और यह क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित रहा है। जानकी मंदिर के निर्माण के ज़रिए अब इसे धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। अमित शाह के हाथों इस योजना की शुरुआत हिंदू आस्था को सम्मान देने के साथ-साथ पूरे मिथिलांचल को राजनीतिक रूप से साधने की एक बड़ी कोशिश है।
🔸 चुनावी रणनीति का केंद्र बनेगा मिथिला
2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जानकी मंदिर प्रोजेक्ट, जिसकी लागत करीब 883 करोड़ रुपए आंकी गई है, एक ओर विकास का प्रतीक है तो दूसरी ओर इसे राम मंदिर मॉडल की तर्ज पर भावनात्मक मुद्दा भी बनाया जा रहा है।
अमित शाह इस दौरे में कई योजनाओं का लोकार्पण करेंगे और जनता को संबोधित भी करेंगे। माना जा रहा है कि उनका भाषण बिहार के सियासी मिजाज को बदलने का प्रयास होगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बीजेपी को परंपरागत रूप से उतना समर्थन नहीं मिला है।
🔸 गठबंधन में तालमेल और शक्ति प्रदर्शन
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, और अन्य NDA नेताओं की उपस्थिति भी संभावित है, जो यह दर्शाता है कि यह दौरा केवल भाजपा का नहीं, बल्कि पूरे गठबंधन की एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन का मंच बनेगा।
