नेपाल ने भारत के साथ चल रहे लंबे समय से सीमा विवाद को एक बार फिर हवा देते हुए अपने नए ₹100 के नोट पर वह विवादित नक्शा जारी किया है, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। यह तीनों क्षेत्र भारत की सीमा के भीतर आते हैं और भारत इन्हें अपना अभिन्न हिस्सा मानता है।
नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा जारी इस नए नोट पर हल्के हरे रंग में बना यह नक्शा साफ़ तौर पर भारत के इन इलाकों को नेपाल के रूप में दर्शाता है ।
भारत ने जताया कड़ा विरोध—‘तथ्य नहीं बदलते’
भारत ने नेपाल के इस कदम की कठोर आलोचना की है और इसे एकतरफा निर्णय बताया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा:
ऐसे दावों से ऐतिहासिक और भौगोलिक सच्चाई नहीं बदलती। नेपाल को भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।
भारत ने यह भी कहा कि इस तरह का कदम द्विपक्षीय समझौतों की भावना के विपरीत है और इससे सीमा वार्ता की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
नक्शा सिर्फ ₹100 के नोट पर—अन्य नोटों पर नहीं
नेपाल के अनुसार विवादित नक्शा केवल ₹100 के नोट पर दर्शाया गया है।
₹10, ₹50, ₹500 और ₹1000 के नोटों पर यह नक्शा नहीं है। बैंक ने कहा कि पुराने ₹100 के नोट पर भी नक्शा मौजूद था, लेकिन अब उसे सरकारी संशोधन के बाद अपडेट किया गया है।
भारत-नेपाल सीमा विवाद की जड़
लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को लेकर भारत और नेपाल का विवाद 1816 के सुगाौली समझौते से जुड़ा है।
समझौते के अनुसार काली नदी का पश्चिमी हिस्सा भारत का,और पूर्वी हिस्सा नेपाल का माना गया था।विवाद इस बात को लेकर है कि काली नदी का वास्तविक उद्गम स्थल कौन-सा है—भारत पूर्वी धारा को उद्गम मानता है। नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम बताता है।
इसी आधार पर दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा करते हैं।
क्यों है यह इलाका इतना रणनीतिक?
यह इलाका भारत–नेपाल–चीन के बीच रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ट्राई-जंक्शन है।
यहाँ से भारत चीनी गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी कर सकता है।कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग भी लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरता है।इसी क्षेत्र में 2020 में भारत ने लिपुलेख तक 80 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया था, जिसे लेकर नेपाल ने पहले भी आपत्ति जताई थी।
