छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित मानव तस्करी और धर्मांतरण मामले में हाल ही में एक बड़ा मोड़ आया है। 2 अगस्त 2025 को बिलासपुर से आई खबर के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार की गईं दो ननों और एक सहयोगी को अदालत ने सशर्त ज़मानत दे दी है।
घटना का विवरण:
गिरफ्तार की गई महिलाओं में नन प्रीति मैरी, वंदना फ्रांसिस और उनकी सहयोगी सुक्खमन मंडावी शामिल हैं। इन तीनों को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में विशेष एनआईए कोर्ट से ज़मानत मिली है। न्यायाधीश तिरलोकचंद कुशवाह ने इन तीनों को राहत दी और कहा कि गिरफ्तारी के बाद से ही सभी न्यायिक हिरासत में थीं।
कानूनी आधार:
इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 143 (ग़ैरकानूनी सभा) और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2023 की धारा 4 (धर्मांतरण का आरोप) के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि ये महिलाएं अवैध रूप से धर्मांतरण में लिप्त थीं।
अदालत का फैसला:
अदालत ने इस मामले में एफआईआर को “संदेह के आधार पर दर्ज” बताया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि प्राथमिकी मुख्यतः अनुमान और शक पर आधारित है। इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि तीनों आरोपित धर्मांतरण या मानव तस्करी में संलिप्त थीं।
