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October 22, 2026
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“पानीपत को मिले ब्राह्मण गौरव का सम्मान, हेमू और पेशवा की प्रतिमा की उठी माँग”

भारत के ऐतिहासिक परिदृश्य में पानीपत केवल एक युद्धक्षेत्र नहीं, बल्कि बलिदान और शौर्य की भूमि रही है। विशेषकर ब्राह्मण समुदाय के लिए यह स्थान एक “रण तीर्थ” के रूप में प्रतिष्ठित है। इस धरती पर हेम चंद्र विक्रमादित्य (हेमू) और मराठा पेशवा जैसे वीर योद्धाओं ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध निर्णायक युद्ध लड़े और देश की अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

इतिहास गवाह है कि पानीपत की युद्धभूमि पर लगभग 40,000 ब्राह्मण योद्धा संगठित होकर लड़े थे। इनमें से अधिकांश ने पेशवा और हेमू के नेतृत्व में विदेशी शक्तियों से लोहा लिया और वीरगति को प्राप्त हुए। कहा जाता है कि उस युद्ध में जनेऊ की एक पूरी परंपरा ही जलकर राख हो गई, लेकिन आत्मबलिदान की वह ज्वाला आज भी जीवित है।

दुख की बात यह है कि इतने महत्वपूर्ण बलिदानों के बावजूद पानीपत में आज तक न तो पेशवा की और न ही हेमू की कोई आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है। यह न केवल ऐतिहासिक अन्याय है, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के बलिदान की अनदेखी भी।

“शर्मा अभियान (ब्राह्मण समरसता अभियान)” के तहत अब यह माँग उठ रही है कि पानीपत को ‘ब्राह्मण रण तीर्थ’ के रूप में मान्यता दी जाए और वहाँ हेमू व पेशवा की प्रतिमाएँ स्थापित की जाएँ। इसके अलावा “BIPA” — ब्राह्मण आइडेंटिटी प्रोटेक्शन एक्ट — को लागू करने की माँग भी तेजी से सामने आ रही है, ताकि ब्राह्मण समाज की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक भूमिका को कानूनी संरक्षण मिल सके।

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