नई दिल्ली | भारत के न्यायिक इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने मंगलवार को देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के तौर पर शपथ ली। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
जस्टिस गवई देश के पहले बौद्ध समुदाय से आने वाले CJI बने हैं, जो सामाजिक समरसता और प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है। उनका कार्यकाल लगभग 6 महीने का होगा और वे 17 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे।
कौन हैं जस्टिस बीआर गवई?
नागपुर से कानून की पढ़ाई करने वाले गवई ने बॉम्बे हाईकोर्ट से वकालत की शुरुआत की थी।
2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट के जज बने, 2019 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत हुए।
संवैधानिक मामलों पर बेबाक राय और न्यायिक निष्पक्षता के लिए जाने जाते हैं।
महत्वपूर्ण फैसलों में भूमिका:
जस्टिस गवई ने कई अहम मामलों में फैसले दिए हैं, जिनमें आर्थिक आरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, और जनहित याचिकाएं शामिल हैं। उनकी न्यायिक शैली सरल भाषा और आम नागरिक की पहुंच के अनुरूप मानी जाती है।
CJI बनने पर क्या बोले:
शपथ के बाद जस्टिस गवई ने कहा— “संविधान का संरक्षण मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। न्याय सबके लिए समान रूप से सुनिश्चित करना मेरा उद्देश्य रहेगा।”
नए CJI से क्या हैं उम्मीदें?
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस गवई न्यायपालिका में विविधता और सामाजिक संतुलन के प्रतीक बनेंगे। उम्मीद है कि वे न्याय में देरी और न्यायिक सुधारों पर तेजी से काम करेंगे।
