छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने एक सनसनीखेज कार्रवाई करते हुए दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 12 साल से फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। ये लोग भिलाई के छावनी कैंप क्षेत्र में छिपकर रह रहे थे और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए अपनी असली पहचान छुपा रहे थे।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान मोहम्मद अली शेख और उनके एक साथी के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि ये लोग पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले का निवासी होने का दावा करते थे, लेकिन वास्तव में ये बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर यहां आए थे।
फर्जीवाड़े का जाल:
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये दोनों व्यक्ति बार-बार अपने ठिकाने बदल रहे थे ताकि उनकी गतिविधियों पर किसी का ध्यान न जाए। ये लोग स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे काम करके गुजारा कर रहे थे। अधिकारियों का मानना है कि इनके फर्जी दस्तावेज किसी बड़े नेटवर्क के जरिए बनवाए गए थे, जिसकी जांच अब की जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई:
यह{keyword:0}दुर्ग पुलिस को गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अवैध प्रवासियों के खिलाफ अभियान के तहत पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी थी। इस अभियान के तहत दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जांच का दायरा बढ़ा:
पुलिस अब इस मामले में गहन जांच कर रही है। फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह और संभावित तस्करी नेटवर्क की तलाश की जा रही है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इन व्यक्तियों का किसी संगठित अपराध या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से संबंध है।
अवैध प्रवास पर सख्ती:
केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत देशभर में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस दिशा में सक्रियता बढ़ा दी है और ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
