दिल्ली/रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने दिल्ली दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के बहुप्रतीक्षित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना पर केंद्र की सहमति मांगी। इस प्रोजेक्ट से बस्तर संभाग के 269 गांवों को सिंचाई और बिजली का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एक विशेष स्मृति चिह्न (तोहफा) भी प्रधानमंत्री को सौंपा।
मुख्य बातें (Key Highlights):
- 1979 में रखी गई थी नींव, लेकिन 1994 में बंद हो गया था प्रोजेक्ट
- 3.66 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 300 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य
- लगभग 6,223 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी का अनुमान
- 269 गांवों को फायदा, लेकिन 42 गांव डूब क्षेत्र में आने की आशंका
- 35-40 हजार लोगों के विस्थापन की संभावना, आदिवासियों में चिंता
- 64 नए सुरक्षा कैंप और ‘सुशासन तिहार’ पर भी हुई चर्चा
क्या है बोधघाट प्रोजेक्ट?
- यह इंद्रावती नदी पर आधारित एक बहुउद्देशीय परियोजना है
- बांध निर्माण के जरिए सिंचाई, बिजली उत्पादन और जल संरक्षण का लक्ष्य
- राज्य सरकार ने इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी कर ली है
- परियोजना छत्तीसगढ़ के सबसे पिछड़े इलाकों को बदलने का माद्दा रखती है
आगे क्या?
- केंद्र से परियोजना की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की उम्मीद
- इसके बाद होगा पर्यावरणीय क्लियरेंस, जन-सहमति और पुनर्वास प्लान पर काम
- 2026 तक निर्माण कार्य शुरू करने का टारगेट
