झारखंड में सामने आया शराब घोटाला सिर्फ एक वित्तीय भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक गठजोड़ की परतें खोल रहा है। इस मामले में अब छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारी ए.पी. त्रिपाठी का नाम भी जांच एजेंसी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के रडार पर आ चुका है। ACB ने त्रिपाठी के खिलाफ रांची कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट दाखिल कर दिया है, जिससे स्पष्ट संकेत है कि उनसे पूछताछ की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।
मामला क्या है?
झारखंड के उत्पाद विभाग से जुड़े इस घोटाले में शराब की खरीद-बिक्री, होलोग्राम सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित करोड़ों रुपये के घपले की बात सामने आई है।
ACB की जांच में अब तक ₹38 करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी सामने आ चुकी है।
इस घोटाले में पहले ही झारखंड के तत्कालीन उत्पाद आयुक्त विनय कुमार चौबे, कई कारोबारी और निजी कंपनियों के प्रतिनिधि आरोपी बनाए जा चुके हैं।
एपी त्रिपाठी की भूमिका
छत्तीसगढ़ के पूर्व विशेष सचिव रहे एपी त्रिपाठी का नाम इस मामले में कथित रूप से नियुक्तियों और ठेकों की मंजूरी से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
ACB को संदेह है कि त्रिपाठी कुछ ऐसे निर्णयों में शामिल रहे हैं जो इस घोटाले की जड़ में हैं।
इसी आधार पर रांची कोर्ट में उनके खिलाफ प्रोडक्शन वारंट दाखिल किया गया है, जिससे उन्हें जेल से लाकर पूछताछ की जा सके।
अदालत की भूमिका और अन्य आरोपी
रांची स्थित विशेष अदालत में अब तक 14 से अधिक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
महाराष्ट्र की प्लेसमेंट एजेंसी “मार्शन इनोवेटिव सिक्योरिटी सर्विसेज” से जुड़े लोगों के खिलाफ भी वारंट मांगा गया है।
8 जुलाई 2025 को कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई तय की गई है।
