वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त व्यापार नीति का संकेत देते हुए 14 देशों पर भारी-भरकम आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। इन टैरिफ की डेडलाइन 9 जुलाई थी, जिसे अब 1 अगस्त 2025 तक बढ़ा दिया गया है
किन देशों पर लगाया गया टैक्स और कितने प्रतिशत?
| टैक्स दर | देश |
|---|---|
| 40% | म्यांमार, लाओस |
| 36% | थाईलैंड, कंबोडिया |
| 35% | बांग्लादेश, सर्बिया |
| 32% | इंडोनेशिया |
| 30% | दक्षिण अफ्रीका, बोस्निया |
| 25% | जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, कज़ाखस्तान, ट्यूनिशिया |
ट्रंप ने कहा कि ये देश अमेरिका के बाजारों का लाभ उठाते हैं लेकिन बदले में अमेरिकी कंपनियों को समान मौका नहीं देते।
ट्रंप ने क्या कहा?
“हम अमेरिका को व्यापार में बराबरी दिलाना चाहते हैं। जब तक देश हमारे साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं करते, तब तक टैरिफ जारी रहेंगे।”
– डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति
क्यों लिया गया ये फैसला?
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ट्रंप लंबे समय से “America First” नीति का पालन कर रहे हैं।
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उनके अनुसार, अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है, जिसका प्रमुख कारण सस्ते विदेशी उत्पाद हैं।
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चीन, दक्षिण एशिया और BRICS देशों से भारी मात्रा में आयात के चलते अमेरिकी कंपनियां घाटे में हैं।
भारत के लिए बड़ी बात: डील का ऑफर
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ट्रंप ने भारत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।
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उन्होंने कहा है कि भारत से व्यापार समझौता लगभग तय है और यह 9 जुलाई से पहले हो सकता है।
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भारत पर फिलहाल कोई अतिरिक्त टैरिफ लागू नहीं किया गया है।
BRICS देशों को भी चेतावनी
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ट्रंप ने BRICS देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका) को भी चेतावनी दी है कि यदि व्यापार समझौते नहीं हुए तो उन पर 10% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा।
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चीन पर पहले से ही कई तरह के प्रतिबंध और टैरिफ लगे हुए हैं।
आर्थिक असर:
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कई देशों के निर्यात पर असर पड़ेगा
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अमेरिकी बाजार में उत्पाद महंगे हो सकते हैं
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अमेरिकी इंडस्ट्री को थोड़ी राहत मिलेगी
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भारत और वियतनाम जैसे देशों को अप्रत्यक्ष लाभ हो सकता है
राजनीतिक असर:
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अमेरिकी चुनावों में ट्रंप की यह नीति मतदाता वर्ग को लुभा सकती है
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कई देश अमेरिका के खिलाफ WTO में अपील कर सकते हैं
डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार पर एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। 14 देशों पर नए टैरिफ और भारत के साथ डील की संभावना दोनों संकेत देते हैं कि उनका लक्ष्य अमेरिका को वैश्विक व्यापार में मजबूत बनाना है — भले ही इसके लिए वैश्विक सहयोग थोड़ा कमजोर ही क्यों न हो जाए।
