छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में भांग की खेती को बढ़ावा देने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह विषय न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार में नहीं आता, बल्कि यह पूरी तरह सरकार और कार्यपालिका का विशेषाधिकार है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि भांग से औषधीय और औद्योगिक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भांग का दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामाजिक और नैतिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे निर्णय सरकार को लेने चाहिए, न कि अदालतों को। इसलिए न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश:
- भांग की खेती को बढ़ावा देने का मुद्दा नीति निर्धारण से जुड़ा
- समाज के लिए हो सकता है नुकसानदेह
- न्यायपालिका नहीं करेगी कार्यपालिका के क्षेत्र में दखल
भांग की खेती को लेकर छत्तीसगढ़ में अब सरकार को ही निर्णय लेना होगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसी नीतिगत बातों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, खासकर जब समाज पर इसके दुष्प्रभाव की आशंका हो।
