देशभर में मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण की घटनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए तीन युवतियों को इस तरह की साजिश से बचा लिया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह मामला न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि समाज को सतर्क रहने की भी चेतावनी देता है।
घटना का विवरण:
दुर्ग रेलवे पुलिस को सूचना मिली कि स्टेशन पर तीन युवतियां दो महिलाओं और एक युवक के साथ संदिग्ध अवस्था में खड़ी हैं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी को रोका और पूछताछ की। युवतियां डरी-सहमी हुई थीं और ठीक से कुछ बोल नहीं पा रही थीं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उन्हें नौकरी का झांसा देकर आगरा ले जाया जा रहा था।
गिरफ्तार युवक का नाम सुखमन मंडावी है, जो नारायणपुर का निवासी है। उसके साथ दो नन — प्रीति मेरी और वंदना फ्रांसिस — थीं। युवतियों की उम्र 18 से 19 वर्ष के बीच है और वे नारायणपुर जिले के ओरछा और कुकड़ाझोर क्षेत्र की रहने वाली हैं।
धोखे से ले जाने की योजना:
युवतियों ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि उन्हें छत्तीसगढ़ में ही नौकरी मिलेगी। लेकिन बाद में जबरन ट्रेन से आगरा ले जाया जा रहा था। वहां उन्हें किसी संस्था में काम पर लगाने की बात कही गई थी। आरोपियों ने उन्हें 8 से 10 हजार रुपए मासिक वेतन, सुविधा और रहने की व्यवस्था का लालच दिया था।
कानूनी कार्रवाई:
पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आईपीसी की धारा 143 और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया। उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से 8 अगस्त तक की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
