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October 20, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

प्राचार्य पदोन्नति को लेकर न्यायालय में घमासान, चार दिनों से लगातार सुनवाई जारी

छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग की ओर से की गई प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया इस समय न्यायिक जांच के घेरे में है। रायपुर उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ में यह मामला सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया है। यह मामला 2813 प्राचार्य पदोन्नत शिक्षकों की सूची और उसमें अपनाए गए मापदंडों से संबंधित है।

पृष्ठभूमि:

28 जुलाई से लगातार इस याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ता की ओर से 28 व 29 जुलाई को अपना पक्ष रखा गया। इसके बाद शासन की ओर से 30 व 31 जुलाई को जवाब प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही अन्य पक्षकारों (Intervenors) को भी अपनी बात रखने का मौका दिया गया।

शासन पक्ष की दलीलें:

शासन का प्रतिनिधित्व करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि मिडिल स्कूल में प्रधान पाठक के रूप में कम से कम 5 वर्षों की सेवा को पदोन्नति के लिए योग्यता मानी गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि व्याख्याता कोटे से प्रमोशन लेने वालों को वरिष्ठता (Seniority) देने का कोई नियम नहीं है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय की डबल बेंच द्वारा भी इसी आधार पर सूची तैयार करने की अनुमति दी गई है और इसी डायरेक्शन को आधार बनाकर सूची बनाई गई है।

याचिकाकर्ता की आपत्तियाँ:

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि शासन द्वारा बनाई गई वरिष्ठता सूची अनुचित है और उसमें योग्य उम्मीदवारों को वंचित किया गया है। उन्होंने इस सूची को रोकने की मांग करते हुए कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। पूर्व में प्रकाशित सूची पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन शासन ने इसे अस्वीकार कर दिया

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