शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों में जब मासूम बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार होता है, तो वह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की संवेदनहीनता का उदाहरण बन जाता है। स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को ज्ञान देने के साथ-साथ उनके नैतिक और मानसिक विकास में मदद करना है, परंतु जब वही संस्थान उनके लिए भय और प्रताड़ना का स्थान बन जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
घटना का विवरण:
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित मदर टेरेसा इंग्लिश मीडियम स्कूल से एक शर्मनाक घटना सामने आई है। नर्सरी में पढ़ने वाली मात्र साढ़े तीन साल की एक बच्ची ने अपनी प्रिंसिपल को “राधे-राधे” कहकर अभिवादन किया। इस धार्मिक अभिवादन पर प्रिंसिपल भड़क गईं और बच्ची को पहले डांटा, फिर उसके मुंह पर टेप चिपका दिया और बाद में उस पर हाथ भी उठाया।
इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मासूम बच्ची डर के मारे स्कूल जाने से मना कर रही है और मानसिक रूप से बेहद आहत है। परिजनों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
सामाजिक प्रतिक्रिया और असर:
इस घटना के वायरल होने के बाद समाज के हर वर्ग में रोष है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब धार्मिक या सांस्कृतिक अभिव्यक्ति करना भी अपराध बन गया है? स्कूल प्रशासन की चुप्पी और संवेदनहीनता भी सवालों के घेरे में है।
इसके साथ ही यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बच्चों के अधिकार और धार्मिक सहिष्णुता जैसे मूलभूत मुद्दों को फिर से उजागर करता है।
