नई दिल्ली | देश की आंतरिक और रणनीतिक सुरक्षा को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार के शीर्ष स्तर पर हलचल देखने को मिली। संसद भवन में गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के बीच अहम बैठक हुई। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अलग से मुलाकात कर विदेश नीति और सुरक्षा मसलों पर चर्चा की।
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठकें हाल के आतंकी इनपुट्स, सीमावर्ती हलचल, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते कूटनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बुलाई गईं।
गृह मंत्री और NSA के बीच बैठक में क्या हुआ?
संसद भवन में आयोजित इस मीटिंग में आंतरिक सुरक्षा, नक्सल गतिविधियां, जम्मू-कश्मीर में आतंकी मूवमेंट, और बॉर्डर इंटेलिजेंस को लेकर समीक्षा हुई।
NSA अजीत डोभाल ने गृह मंत्री को सीमा पार से हो रही घुसपैठ, ड्रोन मूवमेंट, और टेरर फंडिंग नेटवर्क से संबंधित इनपुट सौंपे।
डोभाल ने हाल ही में पाकिस्तान और नेपाल सीमा पर खुफिया एजेंसियों द्वारा पकड़े गए संदिग्ध मूवमेंट्स की विस्तृत रिपोर्ट भी साझा की।
PM मोदी की विदेश मंत्री से अलग मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से लगभग 45 मिनट की एक विशेष बैठक की। इसमें भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध, बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर की स्थिति, और BRICS, ASEAN जैसे वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका पर चर्चा हुई।
घटनाएं जो इन बैठकों की वजह बनीं
- जम्मू-कश्मीर के राजौरी, पुलवामा और कठुआ में आतंकियों की हलचल बढ़ी है।
- भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा पर ड्रोन और संदिग्ध मूवमेंट को लेकर अलर्ट जारी हुआ है।
- संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे, जिसके बाद SOP में बदलाव हुआ था।
- मणिपुर और झारखंड जैसे राज्य भी आंतरिक अशांति और माओवादी गतिविधियों से प्रभावित हैं।
क्या बदलेगी रणनीति?
- देशभर में अलर्ट लेवल बढ़ाया जा सकता है, खासकर संवेदनशील इलाकों में।
- संसद परिसर और VIP मूवमेंट की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा सकती है।
- संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक में राज्यों के DGP और खुफिया प्रमुखों को भी जोड़ा जा सकता है।
- ड्रोन विरोधी तकनीकों और साइबर वॉर रूम को और मज़बूत करने की योजना पर काम तेज़ हो सकता है।
सरकार की मंशा साफ: ‘सुरक्षा में कोई समझौता नहीं’
सरकार इस बात को लेकर स्पष्ट है कि चाहे आतंरिक खतरे हों या बाहरी, हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, संसद सत्र के बाद गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अंतर्गत एक बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें सभी एजेंसियों के प्रमुख मौजूद रहेंगे।
सम्भावित असर:
- जल्द ही देशभर में सुरक्षा की नई गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं।
- साइबर थ्रेट और सोशल मीडिया पर नज़र बढ़ाई जाएगी।
- संसद और प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा AI और फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम से अपग्रेड हो सकती है।
