रायपुर :रायपुर के एक वरिष्ठ और प्रतिष्ठित डॉक्टर को शेयर बाजार में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर एक गिरोह ने 1 करोड़ 50 लाख रुपए की ठगी कर डाली। इस पूरे फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट बड़ी चालाकी से लिखी गई थी, जिसमें आरोपी पति-पत्नी और उनके साथ भाई-बहन शामिल थे। चारों ने मिलकर नकली ट्रेडिंग कंपनी खड़ी की और डॉक्टर को उसका “विशेष क्लाइंट” बताकर फंसा लिया।
शुरुआत में फायदा दिखाया, फिर बड़ा निवेश कराया
ठगों ने डॉक्टर को शेयर मार्केट में शुरुआती निवेश पर कुछ हजार रुपए का मुनाफा दिखाया। विश्वास बढ़ा तो डॉक्टर ने बड़ी रकम लगानी शुरू की। आरोपियों ने निवेश के नाम पर फर्जी रसीदें और ऑनलाइन पोर्टल्स भी दिखाए, जो असल में नकली वेबसाइट्स और ऐप्स थे।
रुपए मिलते ही फरार हो गए
डॉक्टर ने तीन चरणों में करीब 1.50 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। आखिरी ट्रांजेक्शन के बाद सभी आरोपी मोबाइल स्विच ऑफ कर फरार हो गए। डॉक्टर को तब समझ आया कि यह पूरा मामला ठगी का है। उन्होंने रायपुर के थाना गोलबाजार में FIR दर्ज करवाई।
तीन साल तक चलती रही तलाश, ऐसे हुआ पर्दाफाश
पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, बैंक खातों की ट्रैकिंग और डिजिटल फिंगरप्रिंट्स के जरिए धीरे-धीरे आरोपियों की लोकेशन को ट्रैक करना शुरू किया। लंबे समय तक चुप्पी साधे बैठे आरोपी आखिरकार एक बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए पकड़े गए।आरोपी कोलकाता, इंदौर और भुवनेश्वर में बार-बार ठिकाना बदल रहे थे। पुलिस ने नकली फर्म के दस्तावेज, फर्जी चेकबुक और मोबाइल ऐप्स बरामद किए हैं।
कौन हैं आरोपी?
1. मुख्य आरोपी पति-पत्नी:
- पति IT का जानकार, वेबसाइट और फर्जी ट्रेडिंग ऐप बनाता था।
- पत्नी निवेशकों को समझाने में माहिर, सॉफ्ट स्किल्स से भरोसा जीतती थी।
2. सह-आरोपी भाई और बहन:
- भाई खातों में लेनदेन का जिम्मेदार था।
- बहन कॉल सेंटर स्टाइल में क्लाइंट से संपर्क में रहती थी।
पुलिस का अलर्ट:
- शेयर मार्केट में निवेश करते समय सिर्फ SEBI रजिस्टर्ड ब्रोकर और कंपनियों से ही जुड़ें।
- ज्यादा मुनाफे का वादा करने वालों से सावधान रहें।
- किसी भी ऐप या पोर्टल पर निवेश से पहले उसका पूरा वैधता सत्यापन करें।
- ठगी की आशंका हो तो तुरंत साइबर क्राइम सेल या स्थानीय थाने से संपर्क करें।
