रायपुर, छत्तीसगढ़ में इस बार रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ भाई-बहन के प्यार का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह सैकड़ों परिवारों के लिए फिर से एक होने का अवसर बन गया। छत्तीसगढ़ पुलिस के अथक प्रयासों और ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत 581 गुमशुदा बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाया गया। सालों से अपनों से बिछड़े इन बच्चों की वापसी ने रक्षाबंधन को एक भावनात्मक और अविस्मरणीय उत्सव में बदल दिया।
पुनर्मिलन की कहानियां:
रायपुर के विभिन्न इलाकों में आयोजित मिलन समारोह में आंसुओं और मुस्कानों का संगम देखने को मिला। कई बच्चे जो सालों पहले गुम हो गए थे, अपने माता-पिता और भाई-बहनों से मिले। एक 16 साल की लड़की, जो चार साल पहले अपने घर से बिछड़ गई थी, ने अपने छोटे भाई को राखी बांधते हुए कहा, “यह मेरी जिंदगी की सबसे खास राखी है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि फिर से अपने भाई को देख पाऊंगी।” ऐसी ही कई कहानियां इस दिन सामने आईं, जिन्होंने हर किसी का दिल छू लिया।
पुलिस की पहल:
छत्तीसगढ़ पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत गुमशुदा बच्चों को खोजने के लिए दिन-रात मेहनत की। इन बच्चों को न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, और झारखंड से भी खोजकर लाया गया। पुलिस ने स्थानीय एनजीओ, बाल कल्याण समितियों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाया। कई बच्चे रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बरामद किए गए, जहां वे भटक रहे थे।
राखी के साथ पुलिस को सम्मान:
इस खास मौके पर बहनों ने न केवल अपने भाइयों को राखी बांधी, बल्कि पुलिसकर्मियों को भी राखी बांधकर उनका आभार जताया। एक आयोजन में 10 साल की रिया ने पुलिस अधिकारी को राखी बांधते हुए कहा, “आप मेरे असली हीरो हैं, आपने मेरे भाई को वापस लाया।” पुलिसकर्मियों के चेहरों पर भी इस सम्मान से खुशी साफ झलक रही थी। कई परिवारों ने पुलिस को मिठाइयां और उपहार देकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
पुलिस का संकल्प:
छत्तीसगढ़ के डीजीपी ने इस मौके पर कहा, “हमारा लक्ष्य हर गुमशुदा बच्चे को उनके परिवार तक पहुंचाना है। रक्षाबंधन का यह पर्व हमारे लिए भी खास बन गया, क्योंकि हमने सैकड़ों परिवारों की खुशियां लौटाईं।” उन्होंने बताया कि पुलिस इस अभियान को और तेज करेगी ताकि कोई भी बच्चा अपने परिवार से दूर न रहे।
समाज में नई उम्मीद:
इस पहल ने न केवल परिवारों को जोड़ा, बल्कि समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को भी मजबूत किया। रायपुर में आयोजित समारोह में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। सभी ने पुलिस की इस मानवीय कोशिश की जमकर तारीफ की। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “पुलिस का यह काम सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि दिल से की गई सेवा है।”
आंकड़ों का लेखा-जोखा:
- कुल 581 बच्चे अपने परिवारों से मिले, जिनमें 320 लड़के और 261 लड़कियां शामिल थीं।
- इनमें से 70% बच्चे छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से थे, जबकि 30% अन्य राज्यों से बरामद किए गए।
- सबसे कम उम्र का बच्चा 6 साल का था, जो दो साल पहले गुम हो गया था।
पुलिस ने इस अभियान को निरंतर जारी रखने का वादा किया है। साथ ही, लोगों से अपील की गई कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूक रहें और किसी भी गुमशुदगी की स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करें। रक्षाबंधन के इस मौके पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने न सिर्फ परिवारों को एकजुट किया, बल्कि यह भी दिखाया कि इंसानियत और कर्तव्य की डोर से हर बिछड़े को अपने अपनों से जोड़ा जा सकता है।
