छत्तीसगढ़ के घने अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रिय रहे रूपेश उर्फ सतिश सहित 210 नक्सलियों के हालिया आत्मसमर्पण के बाद इलाके में शांति की स्थिति बनी है। वर्षों तक नक्सल प्रभाव के कारण यहां विकास कार्य रुकते रहे, लेकिन अब ग्रामीण बिना डर अपनी मांगें सामने रख रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले सड़क, बिजली, अस्पताल या पुल की मांग उठाना भी बड़ा अपराध माना जाता था। ग्रामीणों को पीटा जाता था, यहां तक कि हत्या भी होती थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं।
करीब डेढ़ महीने पहले तक इस इलाके में किसी भी MLA या अफसर का पहुंचना नामुमकिन था। नक्सलियों की धमकी के चलते जनप्रतिनिधियों को गांव में प्रवेश की इजाजत नहीं मिलती थी। लेकिन हाल ही में क्षेत्र शांत होने के बाद बीजापुर के स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी पहली बार गांव पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं।
ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें पक्की सड़क, पुल, एंबुलेंस, बिजली और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाएं चाहिए। कई महिलाओं ने बताया कि आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि गांव नहीं आया। गर्भवती महिलाओं व बीमारों को अस्पताल ले जाने के लिए रास्ता नहीं होने से बड़ी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं।
कुछ समय पहले ग्रामीणों ने मिलकर श्रमदान से कच्ची सड़क भी बनाई, ताकि आवाजाही में थोड़ी सुविधा हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि नक्सलियों के कारण इतने वर्षों तक विकास कार्य ठप रहे, लेकिन अब वे चाहते हैं कि सरकार तेजी से काम शुरू करे।
गांव के सरकारी भवनों पर आज भी नक्सलियों के नारे लिखे हैं, जो यहां की लंबी चली दहशत की कहानी बयां करते हैं। हालांकि सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ने के बाद हालात सुधार रहे हैं और ग्रामीण बेहतर भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं।
