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September 8, 2026
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“असम में अडानी निवेश पर घिरती सरकार, भूमि अधिग्रहण से उपजे जनआंदोलन”

असम में औद्योगिक निवेश और विकास की बड़ी संभावनाएँ खुल रही हैं, लेकिन इन संभावनाओं के साथ कई गंभीर विवाद भी जन्म ले रहे हैं। अडानी समूह द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण ने स्थानीय समुदायों और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। यह मुद्दा अब केवल विकास बनाम पर्यावरण का न रहकर आदिवासी और स्वदेशी अधिकारों के संरक्षण का प्रश्न बन गया है।

मुख्य मुद्दा – भूमि आवंटन और विरोध:

दीमा हसाओ जिले के उमरांगसो क्षेत्र में अडानी समूह को लगभग 9,000 बीघा आदिवासी भूमि आवंटित किए जाने से विवाद चरम पर पहुँच गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने इस पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से जवाब माँगा है। प्रभावित समुदायों का आरोप है कि यह कदम उनकी पारंपरिक भूमि अधिकारों का उल्लंघन है और उन्हें बिना उनकी सहमति के विस्थापन की ओर धकेला जा रहा है।

विस्तारित निवेश और विस्थापन की चुनौती:

अडानी समूह ने असम में ₹50,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। इसमें हवाई अड्डे, सिटी गैस वितरण, सड़क, ट्रांसमिशन लाइन और सीमेंट फैक्ट्री जैसी परियोजनाएँ शामिल हैं। लेकिन इन योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया हजारों परिवारों को प्रभावित कर रही है। धुबरी, गोलपाड़ा और कोकराझार जिलों में थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए हजारों बीघा जमीन अधिग्रहित की जा रही है। इस वजह से मुस्लिम और स्वदेशी समुदायों में असंतोष और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

सरकारी पक्ष और मुख्यमंत्री का बयान:

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि गुवाहाटी हवाई अड्डे के पास अधिग्रहित की जा रही 500 बीघा भूमि अडानी समूह को नहीं दी जा रही है, बल्कि यह स्टेडियम और कन्वेंशन सेंटर जैसी सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अफवाहों और भ्रामक खबरों से बचें।

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