केरल के वायनाड जिले में स्थित प्राचीन तिरुनेल्ली मंदिर को भगवान विष्णु का निवास माना जाता है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे इस मंदिर को “दक्षिण की काशी” भी कहा जाता है। यहां बहने वाली पापनाशिनी नदी को पाप धोने वाली पवित्र धारा माना जाता है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मंदिर की FD पर बैंकों और ट्रस्ट के बीच विवाद
तिरुनेल्ली मंदिर देवस्वम ने 2025 में स्थानीय को-ऑपरेटिव बैंकों से अपनी Fixed Deposit (FD) की रकम वापस मांगी थी।
मंदिर ट्रस्ट ने कहा— हमें मंदिर के कामकाज और रखरखाव के लिए तुरंत पैसा चाहिए।
लेकिन बैंकों ने रकम लौटाने से इंकार कर दिया।
ट्रस्ट का आरोप—
- बैंक न तो FD बंद कर रहे थे
- न ही रकम लौटाने को तैयार थे
- बार-बार मांगने के बावजूद बैंक बहाने बनाते रहे
अंततः मामला केरल हाईकोर्ट पहुँचा।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया— दो महीने के भीतर मंदिर देवस्वम की पूरी राशि लौटाई जाए।
बैंक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, SC ने याचिका खारिज कर दी
को-ऑपरेटिव बैंकों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
लेकिन SC ने साफ शब्दों में याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ (संवाद के अनुसार CJI सूर्यकांत) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा:
CJI ने बैंक से पूछा—
क्या आप मंदिर के पैसे से बैंक को बचाना चाहते हैं?
कोर्ट ने सख़्त टिप्पणियाँ कीं—
- मंदिर का हर रुपया भगवान की संपत्ति है।
- इसे केवल मंदिर के हित में उपयोग किया जा सकता है, बैंक की ‘सरवाइवल’ के लिए नहीं।
- अगर FD मैच्योर हो गई थी, तो पैसा तुरंत लौटा देना चाहिए था।
जस्टिस बागची ने पूछा— जब FD मैच्योर हुई थी, तब पैसा लौटाने में क्या समस्या थी?
बैंकों के तर्क और कोर्ट की फटकार
बैंकों का पक्ष
- ट्रस्ट ने कभी क्लोजर नहीं मांगा था।
- FD कई सालों से रिन्यू होती रही।
- अचानक दो महीने में बड़ी राशि लौटाना मुश्किल है।
SC का जवाब
- अगर बैंक ग्राहक नहीं ला पा रहे, तो यह आपकी समस्या है।
- मंदिर के भरोसे बैंक नहीं चल सकता।
- मंदिर ट्रस्ट की मांग जायज़ है, बहाने नहीं चलेंगे।
SC ने कहा—मंदिर का पैसा सुरक्षित राष्ट्रीयकृत बैंक में रखें
कोर्ट ने निर्देश दिया—
- मंदिर का धन सुरक्षित और भरोसेमंद राष्ट्रीयकृत बैंक में रखा जाए
- जहां मंदिर को ज्यादा ब्याज मिले
- यदि बैंक को समय चाहिए, तो हाईकोर्ट से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध करे
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया— हाईकोर्ट का निर्देश सही है, मंदिर की राशि लौटनी ही चाहिए।
