छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले ने पूरे राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण दस्तावेज इकट्ठे किए और रायपुर की विशेष अदालत में 8,000 पन्नों का चालान प्रस्तुत किया। यह चालान राज्य के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, क्योंकि इसमें 3,200 करोड़ रुपए के घोटाले का ब्योरा दर्ज है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी शराब की खरीद-बिक्री में अवैध कमीशन लिया गया था और इस कमीशन से एक संगठित सिंडिकेट खड़ा किया गया। इस अवैध नेटवर्क ने न केवल बाजार व्यवस्था को प्रभावित किया बल्कि सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंचाया। नई शराब नीति के चलते राज्य को करीब 248 करोड़ रुपए की राजस्व हानि हुई।
इस घोटाले में कई बड़े नामों को आरोपी बनाया गया है। विजय कुमार भाटिया, संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह वर्तमान में जेल में बंद हैं और इनके खिलाफ ठोस सबूत चालान में पेश किए गए हैं। इसके अलावा, शराब कंपनियों से जुड़े अन्य लोगों पर भी अलग से अभियोग पत्र दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।
यह पूरा मामला इस बात का प्रमाण है कि यदि भ्रष्टाचार पर अंकुश न लगाया जाए, तो राज्य की आर्थिक स्थिति और आम जनता की भलाई पर गहरा असर पड़ सकता है। ऐसे घोटालों से सरकार के प्रति जनता का विश्वास डगमगाने लगता है और सामाजिक व्यवस्था भी कमजोर होती है। इसलिए आवश्यक है कि दोषियों पर शीघ्र और कड़ी कार्रवाई हो, ताकि आने वाले समय में कोई भी व्यक्ति या संगठन इस प्रकार के अवैध कार्य करने का साहस न जुटा सके।
