नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए ने बड़ी जीत दर्ज की है। एनडीए प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को केवल 300 वोट मिले। इस तरह राधाकृष्णन ने 152 वोट के अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल की।
कुल सांसद वोटर: 780
डाले गए वैध वोट: 752
राधाकृष्णन को मिले: 452
रेड्डी को मिले: 300
कौन हैं सीपी राधाकृष्णन?
- तमिलनाडु से भाजपा के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक संगठन से जुड़े रहे।
- दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं।
- भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष भी रहे।
- साफ-सुथरी छवि, सादगी और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव के लिए पहचाने जाते हैं।
- दक्षिण भारत से उपराष्ट्रपति चुने जाने वाले गिने-चुने नेताओं में शामिल।
उपराष्ट्रपति पद का महत्व
- भारत का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद।
- उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के सभापति होते हैं और सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं।
- राष्ट्रपति अनुपस्थित होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास होती है।
क्यों अहम है यह जीत?
एनडीए ने संसद में अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। विपक्षी INDIA गठबंधन को बड़ा झटका। भाजपा ने दक्षिण भारत से उम्मीदवार उतारकर क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक संदेश दोनों दिए। यह चुनाव मोदी सरकार के लिए संसद के आगामी सत्रों में और सहज माहौल बनाने वाला माना जा रहा है।
विपक्ष की हार
बी. सुदर्शन रेड्डी, जो पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रह चुके हैं, INDIA गठबंधन की तरफ से प्रत्याशी थे। विपक्षी दलों ने उन्हें “न्यायप्रिय और संतुलित चेहरा” बताकर समर्थन मांगा था। लेकिन अपेक्षित वोट न मिल पाने से विपक्ष की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सीपी राधाकृष्णन जल्द ही पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। इसके बाद वे राज्यसभा के सभापति का कार्यभार संभालेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी सादगी और सुलझे स्वभाव से सदन की कार्यवाही अधिक सहज हो सकती है।
