बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल में मरीजों के लिए ज़रूरी मशीन की खरीदी का मामला लंबे समय से अटका हुआ है। सरकार ने इस मशीन की खरीदी के लिए 15 करोड़ रुपए की मंजूरी चार माह पहले ही दे दी थी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इस देरी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए शासन से सवाल किया है कि आखिर मंजूरी के बाद भी मशीन क्यों नहीं खरीदी गई। अदालत ने शासन से इस संबंध में शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मशीन का अस्पताल में न पहुंचना मरीजों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। कई महत्वपूर्ण जांच और इलाज इसी मशीन पर निर्भर करते हैं। इसके अभाव में मरीजों को या तो अन्य अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर निजी संस्थानों में महंगे दामों पर जांच करवानी पड़ रही है। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर असर डाल रहा है बल्कि इलाज में देरी से स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए मंजूर बजट का सही उपयोग न होना शासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप इस दिशा में अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि खरीदी की प्रक्रिया तेज़ी से पूरी होगी और मरीजों को राहत मिलेगी।
