फ्रांस इन दिनों भारी विरोध प्रदर्शनों का गवाह बन रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई है। इस विरोध को ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ नाम दिया गया है, जिसमें लोगों ने प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह ठप करने की रणनीति अपनाई है। प्रदर्शन की शुरुआत प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू की नियुक्ति के तुरंत बाद हुई, जिससे राजनीतिक हालात और भी जटिल हो गए।
इन प्रदर्शनों ने फ्रांस के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों पर ट्रैफिक जाम के हालात बन गए हैं, स्कूलों और दफ्तरों में कामकाज ठप है और सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ है। पुलिस ने हालात संभालने के लिए 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और कई जगह प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
इस आंदोलन का नेतृत्व विपक्षी लेफ्ट ग्रुप कर रहा है, जो लंबे समय से मैक्रों की नीतियों का विरोध करता रहा है। यह परिस्थिति नए प्रधानमंत्री लेकोर्नू के लिए एक कठिन परीक्षा साबित हो रही है। वे पहले रक्षा मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद संभालते ही उन्हें तीव्र विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
यह संकट राष्ट्रपति मैक्रों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्हें लेकोर्नू को प्रधानमंत्री इसलिए नियुक्त करना पड़ा क्योंकि पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री बायरू संसद में विश्वास मत हार गए थे और इस्तीफा देने पर मजबूर हुए थे। मगर नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण से पहले ही सड़कों पर उपजे बवाल ने फ्रांस की राजनीति को अस्थिर कर दिया है।
स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में फ्रांस की सरकार को न केवल नीतिगत मुद्दों पर जनता का विश्वास जीतना होगा, बल्कि विरोध की इस लहर को शांत करना भी उसकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
