रायपुर के चर्चित तोमर बंधु — वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी और उनके भाई रोहित तोमर — इन दिनों कई आपराधिक मामलों में फंसे हुए हैं। उन पर सूदखोरी, ब्लैकमेलिंग, धमकी और हत्या की योजना जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। दोनों भाई न्यायालय से अग्रिम जमानत की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन और पुलिस उनके विरुद्ध सख्त रुख अपनाए हुए है।
पृष्ठभूमि
तोमर भाइयों के खिलाफ रायपुर के अलग-अलग थानों में सात से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस का आरोप है कि वे वर्षों से संगठित अपराध के जरिए लोगों का शोषण करते रहे हैं। शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गईं। इस बीच दोनों भाई दो माह से फरार हैं और पुलिस लगातार तलाश कर रही है।
अदालत की कार्यवाही
हाईकोर्ट में तोमर भाइयों ने पाँच अलग-अलग अग्रिम जमानत याचिकाएँ दायर की थीं। अदालत ने इन सभी पर एक साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि आखिरकार एक ही समय में सात एफआईआर दर्ज कैसे हुईं? इस संबंध में रायपुर एसएसपी को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत शपथपत्र सहित जवाब देने का आदेश दिया गया है।
शासन और पुलिस का पक्ष
शासन ने न्यायालय में यह दलील दी कि दोनों भाइयों का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड है। ऐसे में उन्हें अग्रिम जमानत देना न केवल गलत संदेश देगा, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है। पुलिस ने यह भी बताया कि तोमर भाइयों की चार संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं।
बचाव पक्ष का तर्क
तोमर भाइयों की ओर से वकील ने कहा कि उन्हें जानबूझकर संगठित अपराध के केस में फंसाया गया है। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव और व्यक्तिगत दुर्भावना के तहत की जा रही है।
