नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में पर्यावरणीय हालात पर दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला केवल हिमाचल तक सीमित नहीं रह सकता। पूरी हिमालयन बेल्ट—हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट—पर आपदा का खतरा बढ़ता जा रहा है।
अदालत की टिप्पणी
बेंच ने कहा कि “हिमालयी क्षेत्र पूरी तरह संकट में है”।कोर्ट ने चेताया कि अंधाधुंध विकास, जंगल कटान और अनियंत्रित निर्माण पहाड़ों की नींव हिला रहे हैं। अदालत ने कहा—“अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले सालों में हिमाचल जैसे राज्य नक्शे से मिट सकते हैं।”
रिपोर्ट पर सवाल
हिमाचल सरकार ने आपदाओं पर रिपोर्ट सौंपी, जिसमें भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने और ग्लेशियर पिघलने का जिक्र है।
लेकिन कोर्ट ने रिपोर्ट को अधूरी बताते हुए कहा कि इसमें ठोस उपाय और दीर्घकालिक रणनीति का अभाव है।
अगली सुनवाई
अब इस मामले में कोर्ट 23 सितंबर को बड़ा फैसला सुनाएगा, जिसमें पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए नीतिगत दिशानिर्देश तय हो सकते हैं।
