July 23, 2026
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छत्तीसगढ़ में वन भैंसा संरक्षण को झटका, नवजात शावक की अचानक मौत

प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन के लिए वन्यजीवों का संरक्षण अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु ‘वन भैंसा’ अपनी कम होती संख्या के कारण संकटग्रस्त प्रजाति की श्रेणी में आ चुका है। इस प्रजाति को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन हाल ही में बारनवापारा अभयारण्य में हुई एक घटना ने इन प्रयासों की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण

बारनवापारा अभयारण्य में 8 सितंबर 2025 को दो शावकों का जन्म हुआ था। इनमें से एक शावक की 15 सितंबर को अचानक मौत हो गई। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई है, लेकिन शावक की कम उम्र में हुई मौत ने संरक्षण की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। यह वही समूह है जिसमें असम से लाए गए वन भैंसों को बसाया गया है।

वन भैंसा संरक्षण की स्थिति

छत्तीसगढ़ में वन भैंसों की संख्या बेहद कम हो चुकी है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में केवल एक नर भैंसा ‘छोटू’ शेष है, जो अब वृद्ध हो चुका है। इसी वजह से 2020 में असम से एक नर और एक मादा भैंसा लाए गए। बाद में 2023 में चार और भैंसे शामिल किए गए। इन प्रयासों से उम्मीद जगी थी, क्योंकि पिछले वर्ष दो शावकों का जन्म हुआ था और इस वर्ष भी दो शावक पैदा हुए। लेकिन ताजा घटना से यह उम्मीद कमजोर होती दिख रही है।

चुनौतियाँ और आवश्यक कदम

वन भैंसा संरक्षण की सबसे बड़ी चुनौती है—प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक निगरानी। शावकों की मृत्यु यह दर्शाती है कि संरक्षण परियोजना में अभी भी कई सुधार की आवश्यकता है। बेहतर पशु चिकित्सा सुविधा, आधुनिक मॉनिटरिंग और विशेषज्ञों की देखरेख ही इस प्रजाति को बचा सकती है।

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