September 5, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

शहरों में नक्सलियों की नई चाल नाकाम: फंडिंग घटी, SIA ने जाल बिछाया, टॉप लीडर्स पर बढ़ी नजर”

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की जड़ें कमजोर पड़ती जा रही हैं। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने खुलासा किया है कि नक्सली अब जंगलों से बाहर निकलकर शहरों में अपने नेटवर्क फैलाने की कोशिश कर रहे थे। बीते दो सालों से वे नए ठिकाने और फंडिंग चैनल तैयार कर रहे थे, लेकिन अब यह पूरा षड्यंत्र SIA (स्पेशल इंटेलिजेंस एजेंसी) की पकड़ में आ गया है।

SIA की जांच में सामने आया है कि नक्सली अब शहरों में किरायेदार बनकर रह रहे हैं और स्थानीय लोगों के बीच अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर गृह मंत्री ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी संदिग्ध व्यक्ति या किरायेदार की गतिविधियाँ अजीब लगें, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें। सरकार अब नक्सली नेटवर्क की पूरी प्रोफाइलिंग कर रही है ताकि इसे जड़ से समाप्त किया जा सके।

वित्तीय मोर्चे पर भी नक्सलियों की स्थिति डगमगा गई है। विजय शर्मा के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में नक्सलियों की कुल आय में करीब 80% की गिरावट आई है। उनके पास से सोने की बिस्कुट और नकदी बरामद हुई है, लेकिन फंडिंग चैनल अब लगभग बंद हो चुके हैं। इससे उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण आसान हुआ है।

राज्य के डिप्टी सीएम ने पहली बार कुछ टॉप नक्सली लीडर्स के नाम सार्वजनिक किए — सोनू, वेणुगोपाल, सतीश, भरसादेव और हिड़मा। सरकार ने इन नेताओं को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने की बात कही है। अगर ये आत्मसमर्पण करते हैं, तो उनका स्वागत रेड कार्पेट से किया जाएगा और विचारधारा पर खुली चर्चा होगी।

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के नाम पर युवाओं को गुमराह किया गया था, लेकिन अब यह भ्रम धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। सरकार की वैचारिक लड़ाई और जागरूकता अभियान से कई युवा मुख्यधारा में लौट रहे हैं। नक्सलवाद अब केवल हथियारों की नहीं, बल्कि विचारों की लड़ाई बन गया है — जिसे सरकार जनता के सहयोग से जीतने के लिए प्रतिबद्ध है।

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