छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर नवंबर महीने में एक ऐतिहासिक आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। राज्य में पहली बार डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस (DG-IG Conference) का आयोजन होगा। 28 नवंबर से शुरू होने वाली यह तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस 30 नवंबर तक चलेगी। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में देश के पुलिस प्रमुख, सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और गृह सचिव शामिल होंगे। कॉन्फ्रेंस का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
इस सम्मेलन का उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गहन मंथन करना है। इसमें खास फोकस नक्सल विरोधी अभियानों, साइबर सुरक्षा, और ड्रग्स तस्करी पर रहेगा। वर्तमान में देशभर में चल रहे नक्सल मुक्त भारत अभियान के बीच यह कॉन्फ्रेंस काफी अहम मानी जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में यह बैठक सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति को नई दिशा देगी।
कॉन्फ्रेंस के दौरान सुरक्षा एजेंसियां अब तक चलाए गए अभियानों की समीक्षा करेंगी और 2026 तक नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए नई रणनीति बनाएंगी। विशेष रूप से छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों में नक्सल प्रभाव को खत्म करने के उपायों पर चर्चा होगी।
इसके अलावा इस बैठक में देश के सीमावर्ती राज्यों से ड्रग्स की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल की बढ़ती गतिविधियों पर भी मंथन किया जाएगा। ड्रग्स की आपूर्ति रोकने के लिए पड़ोसी देशों के साथ समन्वय पर भी विचार किया जाएगा।
यह सम्मेलन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि माओवादी संगठनों में हाल के समय में दो गुटों के बीच मतभेद सामने आए हैं। कुछ माओवादी गुट अब शांति वार्ता के लिए हथियार छोड़ने की इच्छा जता चुके हैं। ऐसे में यह बैठक नक्सल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
2014 से यह कॉन्फ्रेंस देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित की जा रही है। इससे पहले इसका आयोजन दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, भुवनेश्वर, पुणे, गुवाहाटी, कच्छ, केवड़िया, हैदराबाद और ग्वालियर में हो चुका है। अब पहली बार छत्तीसगढ़ को इस प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी का मौका मिला है, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।
यह सम्मेलन न केवल नक्सल विरोधी अभियान को गति देगा बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय एकता को भी और मजबूत करेगा।
