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October 23, 2026
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छत्तीसगढ़

जन्मदिन पर चिता सजाई, केक काटा लेकिन बेटी नहीं लौटी… पिता के आंसुओं से भीग गया मुक्तिधाम

8 अक्टूबर 2025, कटघोरा।यह दिन एक पिता के लिए हमेशा के लिए दर्द का सबब बन गया। आमतौर पर जब किसी नन्हीं बेटी का जन्मदिन आता है, तो पिता उसकी खुशी के लिए हर संभव तैयारी करता है — केक, गुब्बारे, खिलौने और खुशियों से भरा घर। लेकिन कटघोरा में एक पिता की मजबूरी ऐसी थी कि उसे अपनी मासूम बेटी का जन्मदिन मुक्तिधाम (श्मशान घाट) में मनाना पड़ा।

उसने अपनी बेटी की चिता सजाने से पहले उसका जन्मदिन मनाया। चारों ओर गुब्बारे सजाए गए, जन्मदिन का केक रखा गया, और बेटी की नन्हीं देह के पास पिता ने कांपते हाथों से मोमबत्ती जलाई। लेकिन इस बार बेटी ने न तो केक खाया, न ही अपने पिता को गले लगाया।

मां और बेटी दोनों की मृत्यु के बाद, मुक्तिधाम में जब अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी, तब हर कोई इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठा। पिता की आंखों से बहते आंसू, उसकी बेबसी और टूटे हुए दिल की कहानी खुद बयान कर रहे थे।

जो भी वहां मौजूद था, उसकी आंखें नम हो गईं। यह दृश्य इस बात का गवाह बना कि एक पिता के लिए उसकी बेटी की मुस्कान से बड़ी कोई खुशी नहीं होती — और उसकी विदाई से बड़ा कोई दुख नहीं।

यह घटना न सिर्फ समाज को झकझोरती है, बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि परिवार का मूल्य, प्यार और रिश्तों की अहमियत किसी भी चीज़ से बढ़कर है।

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