सुप्रीम कोर्ट के अंदर एक असाधारण और विवादित घटना हुई: एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। यह केवल एक सुरक्षा उल्लंघन भर नहीं था, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा, संवैधानिक संस्थानों की स्वतंत्रता और सामाजिक-सांस्कृतिक संवेदनाओं के बीच टकराव का प्रतीक भी बन गया। इस घटना को लेकर सरकारी वकील, मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों ने विभिन्न बयान दिए, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।
घटना का विवरण
घटना के समय CJI बी.आर. गवई कोर्ट नंबर 1 में सुनवाई कर रहे थे। तभी 71 वर्ष के वकील राकेश किशोर ने एक जूता फेंकने की कोशिश की।
अभियुक्त ने भनभनाते हुए “सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाए।
सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और वकील को कोर्ट परिसर से बाहर ले जाया गया। सुनवाई कुछ देर स्थगित हुई और फिर पुनः जारी हुई।
घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तुरंत यह कदम उठाया कि राकेश किशोर को निलंबित कर दिया जाए। उन्हें किसी भी कोर्ट, ट्रिब्यूनल या अन्य अधिकरणों में पैरवी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बेंगलुरु पुलिस ने इस घटना के संबंध में “जीरो FIR” दर्ज की है, यानी जहां घटना हुई हो, वहां उद्घाटन मामला न हो, उस मामले को भी दर्ज किया गया।
अभियुक्त ने बताया कि उन्होंने इस कदम को “भगवान की प्रेरणा” बताकर इसे धार्मिक अपमान के प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है।
सरकारी वकील और मुख्यमंत्री के बयान
छत्तीसगढ़ सरकार के वकील ने इस घटना पर कहा, “71 की उम्र में कमाल की निशानेबाजी”, जो एक तरह की व्यंग्यात्मक टिप्पणी मानी गई।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्थिति को दलित सम्मान पर हमला बताया और कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की हरकत नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और समाज में निहित शक्ति संतुलन पर सवाल है।
न्यायपालिका और प्रतिक्रिया
CJI गवई ने इस घटना पर पहली टिप्पणी करते हुए कहा कि वे “बहुत आश्चर्यचकित” हैं और इसे एक “भुला दिया गया अध्याय” करार दिया।
अन्य न्यायाधीशों ने इस घटना को गंभीरता से लिया और कहा कि न्यायपालिका की गरिमा में सेंध लगाने का प्रयास अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक अवमानना बताया और कहा कि इस तरह की हरकतों का परिणाम गंभीर होना चाहिए।
सामाजिक-पौराणिक और जातिगत आयाम
यह घटना विशेष रूप से संवेदनशील इसलिए हो गई क्योंकि CJI गवई दलित पृष्ठभूमि से हैं और इस हमले को कतिपय लोगों ने जातिगत और धार्मिक टिप्पणी आधारित हमला माना।
