July 22, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

हथियार छोड़ शांति की राह पर नक्सली, संगठन ने कहा गद्दार

जगदलपुर में नक्सली आंदोलन को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय समिति के सदस्य रूपेश समेत 210 नक्सलियों ने हथियार डालकर सरेंडर कर दिया। इस फैसले ने पूरे माओवादी संगठन को हिला कर रख दिया है। माओवादी संगठन ने सरेंडर करने वाले साथियों को “गद्दार” बताया है, लेकिन रूपेश का कहना है कि यह कदम उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी पार्टी को बचाने और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाया।

रूपेश ने बताया कि महासचिव बसवा राजू भी संघर्ष विराम चाहते थे, लेकिन उनके एनकाउंटर के बाद परिस्थितियां और कठिन हो गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघर्ष जारी रखने से साथियों की जान पर खतरा था और संगठन का भविष्य भी अंधकारमय दिखाई दे रहा था। इसलिए संगठन को बचाने और साथियों की सुरक्षा के लिए सरेंडर के अलावा कोई और रास्ता नहीं था।

रूपेश ने यह भी कहा कि दंडकारण्य की बैठकों में उत्तर बस्तर के साथियों की राय छुपाई गई। संगठन ने उन्हें असली स्थिति से अनजान रखा। यही कारण था कि रूपेश और उनके साथियों ने शांतिपूर्ण रास्ता चुनते हुए हथियार डालने का निर्णय लिया।

सरेंडर के बाद माओवादी संगठन में अफरा-तफरी मच गई है। संगठन की ओर से जारी पर्चे में रूपेश सहित 210 नक्सलियों को गद्दार बताया गया, लेकिन रूपेश ने जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी छोड़कर कोई गलत काम नहीं किया। उनका उद्देश्य संघर्ष नहीं, बल्कि अपने साथियों और समाज के लिए एक सुरक्षित भविष्य बनाना है।

17 अक्टूबर को रूपेश और उनके साथियों ने पुलिस के सामने हथियार डाले और मुख्यालय लाए गए। इस सरेंडर को नक्सली आंदोलन में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नक्सली संगठन की जड़ों में दरार और गहरी हो सकती है।

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