रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा बुधवार को जब शुरू हुई, तो माहौल शुरू से ही राजनीतिक तनाव से भरा हुआ था। कांग्रेस पार्टी द्वारा नेता प्रतिपक्ष बदले जाने के निर्णय पर विपक्षी पार्षदों ने कड़ा विरोध जताया, जिसके चलते बैठक में कई बार नारेबाजी और हंगामा हुआ। इसके बावजूद, करीब 6 घंटे चली बैठक में कुल 14 एजेंडों पर चर्चा की गई और सभी को बहुमत से पारित कर दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष बदलने पर विवाद
निगम की आमसभा से ठीक पहले कांग्रेस ने आकाश तिवारी को नया नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया। इस बदलाव से विपक्ष के कुछ पार्षदों में नाराजगी देखने को मिली। पूर्व नेता प्रतिपक्ष संदीप साहू के समर्थकों ने इस निर्णय को “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
सभा शुरू होते ही इस मुद्दे पर गरमागरम बहस हुई। कई पार्षदों ने सदन में नारेबाजी की, जबकि महापौर एजाज ढेबर ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
6 घंटे तक चली बैठक, सभी 14 एजेंडे पास
हंगामे के बीच भी निगम कार्यवाही जारी रही। बैठक में शहर से जुड़ी 14 अहम योजनाओं और प्रस्तावों पर चर्चा हुई — जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
1. सड़क मरम्मत और नालों की सफाई योजना
2. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना (Waste Management Project)
3. राजस्व वसूली और संपत्ति कर सुधार प्रस्ताव
4. विकास कार्यों के ठेके एवं भुगतान संबंधी नीति संशोधन
5. नवीन आवासीय योजनाओं की स्वीकृत
इन सभी प्रस्तावों को अंततः बहुमत से पास कर दिया गया। निगम प्रशासन ने कहा कि “बैठक में लिए गए सभी निर्णय सार्वजनिक हित में हैं और जल्द लागू किए जाएंगे।”
सभापति और महापौर का बयान
सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा,
> “नेता प्रतिपक्ष का बदलाव कांग्रेस दल का आंतरिक निर्णय है, निगम की प्रक्रिया इससे प्रभावित नहीं होगी। सभी एजेंडे पारदर्शिता से पास किए गए हैं।”
वहीं, महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि हंगामे के बावजूद विकास कार्य रुकेंगे नहीं।
> “जनहित से जुड़े मुद्दों पर निगम एकजुट है। विपक्ष को भी शहर के विकास में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।”
विपक्षी पार्षदों की प्रतिक्रिया
विपक्षी पार्षदों ने कहा कि उनके विचारों को पर्याप्त समय नहीं दिया गया और एजेंडों को जल्दबाजी में पास किया गया।
> “बैठक औपचारिकता बनकर रह गई है। जनता से जुड़े कई सवालों के जवाब नहीं मिले,” — एक विपक्षी पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।
विश्लेषण:
रायपुर नगर निगम की राजनीति इन दिनों कांग्रेस गुटबाज़ी और संगठनात्मक मतभेदों से प्रभावित दिखाई दे रही है। नेता प्रतिपक्ष का बदलाव न केवल विपक्ष के भीतर शक्ति-संतुलन को बदल रहा है, बल्कि यह आने वाले शहरी निकाय चुनावों पर भी असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निगम की बैठकों में लगातार हो रहे हंगामे से विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है।
6 घंटे चली इस बैठक में भले ही सभी प्रस्ताव पारित कर दिए गए हों, लेकिन विपक्ष के विरोध और नेता प्रतिपक्ष विवाद ने निगम की राजनीतिक स्थिति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि लिए गए निर्णय जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से लागू होते हैं।
