छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आयोजित एक ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम इन दिनों गंभीर विवाद का विषय बना हुआ है। मनोरंजन के नाम पर हुए इस आयोजन में खुलेआम अश्लीलता परोसी गई, जिसने सामाजिक मर्यादाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यक्रम के दौरान मंच पर अर्धनग्न अवस्था में नृत्य करती डांसरों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
जानकारी के अनुसार यह आयोजन कई दिनों तक चला, जिसमें अलग-अलग तारीखों में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी, पुलिसकर्मी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। बताया गया कि आयोजन स्थल पर देर रात 11 बजे से लेकर सुबह 3 बजे तक अश्लील नृत्य चलता रहा। भीड़ बेकाबू हो गई थी और कई लोग मंच के पास जाकर डांसरों पर पैसे उड़ाते और आपत्तिजनक हरकतें करते नजर आए।
वीडियो में यह भी सामने आया कि कुछ पुलिसकर्मी और अधिकारी न केवल कार्यक्रम देखते रहे, बल्कि मोबाइल से वीडियो बनाते हुए भी दिखाई दिए। इससे यह सवाल उठने लगा कि क्या इस आयोजन को मौन सहमति या संरक्षण प्राप्त था। बताया गया कि ऑर्केस्ट्रा डांसरों को एक दिन के लिए मोटी रकम दी जा रही थी और दर्शकों से 200 से 400 रुपये तक की एंट्री फीस वसूली गई।
वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारी को पद से हटाया गया और जांच समिति गठित की गई। इसके साथ ही आयोजन समिति के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने अश्लीलता फैलाने, कानून-व्यवस्था भंग करने और नैतिक मर्यादा को ठेस पहुंचाने के आरोपों में कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि यदि प्रशासनिक निगरानी कमजोर हो, तो मनोरंजन के नाम पर समाज को गलत दिशा में धकेला जा सकता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसे आयोजनों पर किस तरह की सख्ती बरती जाती है।
