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October 20, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर छिड़ा संग्राम: बृहस्पति सिंह का रिश्वत का आरोप, कांग्रेस ने बताया साजिश

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नई सूची आने से पहले ही सियासी तूफान खड़ा हो गया है। पार्टी से निष्कासित पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने कांग्रेस की सह प्रभारी जरिता लैटफ्लांग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिला अध्यक्ष बनाए जाने के नाम पर दावेदारों से 5 से 7 लाख रुपए तक की रिश्वत मांगी जा रही है।

बृहस्पति सिंह ने आरोप लगाया कि बलरामपुर, बैकुंठपुर, अंबिकापुर, सूरजपुर और जशपुर जैसे जिलों में कई उम्मीदवारों से फोन कॉल कर पैसे की मांग की जा रही है। उन्होंने बताया कि कॉल करने वाले व्यक्ति खुद को “कांग्रेस सह प्रभारी जरिता मैडम” बताते हैं और फिर उनसे बाकायदा बात भी कराई जाती है।

पूर्व विधायक ने कहा कि पहले भी प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के कार्यकाल में टिकट और नियुक्तियों के लिए पैसे लिए गए थे। उनका कहना है कि जरिता लैटफ्लांग उसी रास्ते पर चल रही हैं और यह पार्टी की साख को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर इस तरह रिश्वत लेकर जिला अध्यक्षों की नियुक्ति होगी, तो कांग्रेस में सेवा भाव और पारदर्शिता कहां बचेगी?”

बृहस्पति सिंह ने कांग्रेस हाईकमान से इस पूरे मामले की सख्त जांच की मांग करते हुए कुमारी शैलजा और जरिता लैटफ्लांग को तत्काल पद से हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह भ्रष्टाचार पार्टी की जड़ों को कमजोर कर रहा है और कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल रहा है।

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने बयान जारी करते हुए कहा कि बृहस्पति सिंह के आरोप “निराधार और बेबुनियाद” हैं। वे पहले ही पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं और दोबारा वापसी की कोशिश कर रहे थे। पार्टी उनके आवेदन पर कोई विचार नहीं कर रही।

शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान पारदर्शी प्रक्रिया के तहत जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर रहा है, जिसमें ब्लॉक स्तर से कार्यकर्ताओं की राय ली जा रही है ताकि समर्पित और मेहनती कार्यकर्ताओं को अवसर मिले।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद न सिर्फ कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि राज्य संगठन की दिशा पर भी सवाल खड़े करता है। नई सूची जारी होने से पहले ही उठे आरोपों ने कांग्रेस के भीतर असंतोष और गुटबाजी को और हवा दे दी है।

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