छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से जुड़े मुद्दों पर किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने घोषणा की है कि 26 नवंबर को प्रदेशभर के किसान रायपुर के मोतीबाग से राजभवन तक मोर्चा करेंगे। यह मार्च न केवल धान के समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग पर केंद्रित होगा, बल्कि बिजली बिलों में बढ़ोतरी, तकनीकी दिक्कतों और किसानों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के खिलाफ भी आवाज उठाएगा।
किसान संगठनों का कहना है कि सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया था, जबकि केंद्र द्वारा इस वर्ष एमएसपी में केवल 186 रुपये की वृद्धि की गई है। किसानों की मांग है कि इस बार उन्हें कम से कम 3286 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य मिलना चाहिए।
किसानों ने आरोप लगाया कि धान खरीदी प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद एग्रीस्टैक पोर्टल, पंजीयन और तकनीकी सिस्टम में अब भी कई तरह की दिक्कतें हैं, जिसके कारण उन्हें बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसान इन प्रमुख मुद्दों को लेकर करेंगे राजभवन मोर्चा
- बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का मुआवजा न मिलना
- एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन में तकनीकी दिक्कतें
- बिजली बिलों में बढ़ोतरी से किसानों पर बढ़ा बोझ
- जमीन की ऑनलाइन रजिस्ट्री को लेकर विरोध
- सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल से संचालन प्रभावित
- धान खरीदी में असमंजस और प्रशासनिक देरी
धान खरीदी का वर्तमान आंकड़ा
प्रदेश के सीमित 195 उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी शुरू हो चुकी है। अब तक 19,464 क्विंटल धान खरीदा गया है। हालांकि प्रदेश में कुल 2,739 उपार्जन केंद्र हैं और सरकार का दावा है कि सभी केंद्रों में खरीदी शुरू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
सहकारी समितियों की हड़ताल से खरीदी प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से 2,739 डेटा एंट्री ऑपरेटर नियुक्त किए हैं। किसानों की शिकायतों के तेजी से समाधान के लिए सरकार ने टोलफ्री हेल्पलाइन 1800-233-3663 भी जारी की है।
