छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री कावासी लखमा की तबीयत बिगड़ने के मामले पर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि छह बार के विधायक और वरिष्ठ मंत्री रहे लखमा को इलाज में घोर लापरवाही बरती जा रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार राजनीतिक आधार पर पक्षपात कर रही है और लखमा को बाहरी अस्पताल में इलाज की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बताया कि जेल अस्पताल की स्थिति देखते हुए लखमा को तत्काल विशेष उपचार की जरूरत थी। जेल प्रशासन ने उन्हें रेफर तो किया, लेकिन लंबे समय तक उन्हें बाहर के अस्पताल में नहीं ले जाया गया। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने डीजीपी से मुलाकात कर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। दबाव बढ़ने पर शनिवार रात लखमा को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी आंखों का इलाज शुरू किया गया है। अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
लखमा इस समय रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें 15 जनवरी 2025 को प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी का आरोप है कि वह सिंडिकेट के अहम सदस्य थे और उसी के इशारों पर शराब नीति में बदलाव, कमिशन फिक्सिंग और अवैध सप्लाई का नेटवर्क चलता था। एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और तीन वर्षों में 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई हुई।
कांग्रेस का कहना है कि मामले की जांच राजनीतिक बदले की भावना से प्रभावित है, जबकि सरकार और ईडी अपने आरोपों पर अडिग हैं। इलाज को लेकर हुई देरी ने इस पूरे मसले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
