संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद रेणुका चौधरी एक कुत्ते के साथ संसद परिसर में पहुंचीं, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में विवाद छिड़ गया। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब मीडिया ने उनकी कार में मौजूद कुत्ते का वीडियो साझा किया।
भाजपा सांसदों ने इसे संसद के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया और कार्रवाई की मांग की। वहीं रेणुका चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी नियम को तोड़ना नहीं था, बल्कि उन्होंने रास्ते में दुर्घटना के बाद सड़क पर भटक रहे कुत्ते को कार में बैठा लिया।
चौधरी ने तंज कसते हुए कहा—
“ये छोटा और नुकसान नहीं पहुंचाने वाला जानवर है। काटने वाले और डराने वाले संसद में हैं, कुत्ते नहीं।”
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि विशेषाधिकार का मतलब नियमों का दुरुपयोग नहीं है, और पालतू जानवरों को संसद लाना संविधान और सुरक्षा प्रोटोकॉल के विपरीत है।
संसद भवन परिसर व्यवहार एवं आचरण नियमों के अनुसार परिसर में केवल अधिकृत व्यक्ति और सुरक्षा अनुमति वाली वस्तुएं ही ले जाई जा सकती हैं। लोकसभा हैंडबुक में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि ऐसा कोई जीव या वस्तु नहीं लाई जा सकती जो सुरक्षा या मर्यादा को प्रभावित करे।
रेणुका चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि वह रास्ते में एक हादसे की वजह से रुकीं और तभी सड़क पर घूम रहे कुत्ते को कार में बैठाया। उन्होंने कहा कि इसे बेवजह का मुद्दा बनाया जा रहा है और उनकी मंशा केवल जानवर की सुरक्षा थी।
