दुर्ग जिले के ग्राम बेलौदी में स्कूलों में लगातार बढ़ रही शिक्षक कमी ने आखिरकार बच्चों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया। सोमवार सुबह मिडिल और प्राइमरी स्कूल के छात्र-छात्राएं अपने पालकों और ग्रामीणों के साथ दुर्ग–नगपुरा मुख्य मार्ग पर बैठ गए। बच्चों ने नारेबाज़ी करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई और चक्का जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बीते कई महीनों से लगातार शिकायतों के बाद भी शिक्षा विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। बेलौदी मिडिल स्कूल में पहले दो स्थायी शिक्षक और एक प्रधान पाठक पदस्थ थे, लेकिन प्रधान पाठक के प्रमोशन के बाद उनका तबादला हो गया और बाकी दोनों शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी लग जाने से स्कूल लगभग खाली हो गया। शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यही स्थिति प्राइमरी स्कूल में भी है, जहाँ एकमात्र शिक्षिका की ड्यूटी भी बीएलओ में लगा दी गई, जिसके बाद गांव पंचायत को अस्थायी शिक्षक की व्यवस्था करनी पड़ी।
लगातार अव्यवस्था से क्षुब्ध छात्रों ने सोमवार सुबह सड़क पर बैठकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी बच्चों के साथ उनके पालक व ग्रामीण भी सड़क पर उतर आए और नगपुरा रोड को जाम कर दिया। लोगों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई महीनों से बाधित हो रही है, लेकिन प्रशासन ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।
इस पूरे विवाद पर संकुल प्राचार्य ने दावा किया कि शनिवार को ही संबंधित स्टाफ को स्कूल में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए थे। प्राचार्य के अनुसार सोमवार से सभी शिक्षक स्कूल पहुँच गए हैं और पढ़ाई पुनः शुरू करा दी गई है। वर्तमान में प्राइमरी और मिडिल स्कूल में कुल 159 बच्चे अध्ययनरत हैं—प्राइमरी में 92 और मिडिल (कक्षा 6 से 8) में 67 छात्र।
प्रदर्शन के बाद गांववासियों ने उम्मीद जताई कि अब शिक्षा व्यवस्था सामान्य होगी और विभाग स्थायी समाधान सुनिश्चित करेगा।
