उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेस-वे पर घना कोहरा एक भीषण हादसे की वजह बन गया। बलदेव थाना क्षेत्र के माइलस्टोन 127 के पास अचानक दृश्यता शून्य होने से एक के बाद एक वाहन आपस में टकराते चले गए। इस दर्दनाक दुर्घटना में 8 बसें और 3 कारें शामिल रहीं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कई वाहनों में तुरंत आग लग गई और देखते ही देखते पूरा इलाका आग और धुएं की चपेट में आ गया।
हादसे में अब तक 13 लोगों की जिंदा जलकर मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 66 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों की पहचान करना मुश्किल हो गया है, क्योंकि कई शव पूरी तरह झुलस चुके हैं। पुलिस ने मानव अंगों के अवशेष 17 पॉलीथिन बैग में एकत्र किए हैं, जिनकी पहचान डीएनए टेस्ट के जरिए कराई जाएगी। आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद ऐसा लगा मानो कोई बम फट गया हो। लोग जान बचाने के लिए बसों के शीशे तोड़कर बाहर कूदने लगे, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में बसें जलकर राख हो गईं। सूचना मिलने के करीब 10 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
रेस्क्यू कार्य में पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीमें शामिल रहीं। करीब 50 जवानों और 9 थानों की पुलिस ने 6 घंटे तक अभियान चलाकर घायलों और शवों को बाहर निकाला। हादसे के कारण यमुना एक्सप्रेस-वे पर लगभग 3 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसे कड़ी मशक्कत के बाद हटाया गया।
घायलों को 20 एंबुलेंस की मदद से मथुरा जिला अस्पताल और वृंदावन संयुक्त जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायलों को आगरा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
यह हादसा एक बार फिर घने कोहरे के दौरान एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
