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April 16, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की वोटर लिस्ट में 27 लाख से अधिक नाम हटाए गए; बड़ी संख्या में लोग मृत, शिफ्ट या डुप्लिकेट पाए गए

छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद सामने आए आंकड़ों ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था—दोनों का ध्यान खींचा है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के साथ ही यह स्पष्ट हुआ कि लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह संख्या बड़ी जरूर है, लेकिन इसके पीछे चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, शुद्ध और अद्यतन बनाने का उद्देश्य बताया गया है।

इस पुनरीक्षण के दौरान बूथ-लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर सत्यापन किया। सत्यापन में यह सामने आया कि करीब 19 लाख मतदाता अपने पुराने पते से शिफ्ट हो चुके हैं—कुछ ने जिले या राज्य बदला, तो कुछ लंबे समय से उस पते पर निवास नहीं कर रहे थे। इसके अलावा लगभग 6 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई जिनकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम अब तक वोटर लिस्ट में दर्ज थे। वहीं, एक अन्य श्रेणी में डुप्लिकेट नाम भी पाए गए, यानी एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज था।

प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई है, ताकि चुनाव के समय फर्जी या निष्क्रिय मतदाताओं के कारण किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो। ड्राफ्ट सूची को अंतिम नहीं माना जाता; यह केवल प्रारंभिक चरण है, जिसमें सुधार की पूरी गुंजाइश रहती है।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद आम मतदाताओं को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने नाम की जांच स्वयं करें। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो वह दावा-आपत्ति (Claims & Objections) की प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकता है। इस दौरान पहचान और पते से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर नाम दोबारा जोड़ा जा सकता है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, दावे-आपत्तियों की जांच के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम का प्रभाव सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर देखा जा रहा है। एक ओर जहां मतदाता अपने अधिकार को लेकर सतर्क हुए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि मतदान अधिकार सुरक्षित है, बशर्ते नागरिक समय पर सत्यापन और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया सही ढंग से लागू होती है, तो आने वाले चुनावों में मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित होगी।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में वोटर लिस्ट से 27 लाख नामों का हटना किसी को वंचित करने की कार्रवाई नहीं, बल्कि सूची की शुद्धता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब जिम्मेदारी मतदाताओं पर है कि वे समय रहते अपना नाम जांचें और आवश्यक सुधार कराएं, ताकि चुनाव के दिन उनका मताधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहे।

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