April 18, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“जनहित याचिका पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, सामाजिक कार्यों का शपथपत्र अनिवार्य”

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में वासु चक्रवर्ती द्वारा प्रस्तुत इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश रेशि सिन्हा ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को अपने वास्तविक सामाजिक कार्यों का प्रमाण देना होगा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल दावा करने से कोई सामाजिक कार्यकर्ता नहीं कहलाता, बल्कि जनता के हित में किए गए कार्यों के ठोस सबूत प्रस्तुत करने होंगे। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से शपथपत्र सहित उन कार्यों की सूची मांगी है, जो अब तक उन्होंने समाज के लिए किए हैं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि राजनीति से प्रेरित याचिकाओं को अदालत में स्थान नहीं मिलना चाहिए, बल्कि न्यायालय का समय केवल वास्तविक जनहित मामलों में लगना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए निर्देश दिया कि वे पहले यह साबित करें कि वास्तव में वे जनता के बीच सामाजिक कार्य कर चुके हैं। जब याचिकाकर्ता के वकील किशोर भादुड़ी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया, तो कोर्ट ने कहा कि पहले एफिडेविट प्रस्तुत किया जाए।

इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। उससे पहले याचिकाकर्ता को अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल करना होगा, जिसमें अब तक किए गए सामाजिक कार्यों का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा। इस मामले की पैरवी किशोर भादुड़ी और अभ्युदय सिंह ने की।

यह मामला न केवल याचिकाकर्ता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में दायर होने वाली जनहित याचिकाओं के लिए भी एक मानक तय कर सकता है। इससे यह स्पष्ट होगा कि अदालत वास्तविक जनहित को ही महत्व देगी और राजनीतिक उद्देश्य वाली याचिकाओं को दरकिनार करेगी।

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