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October 22, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

रूआबांधा मैदान पर आवास परियोजना को लेकर टकराव: 57 घरों के नोटिस पर बस्ती में उबाल, 5 दिन से अनिश्चितकालीन धरना

दुर्ग–पाटन रोड स्थित भिलाई नगर निगम क्षेत्र के रिसाली इलाके में रूआबांधा मैदान इन दिनों विवाद का केंद्र बना हुआ है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा तालपुरी भिलाई में ब्लॉक-सी योजना के तहत आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होते ही रूआबांधा बस्ती के निवासी विरोध में उतर आए हैं। पिछले पांच दिनों से बस्तीवासी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

गृह निर्माण मंडल का कहना है कि यह जमीन बीएसपी से विधिवत खरीदी गई थी। इसके बाद लेआउट प्लान, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की स्वीकृति, भवन अनुज्ञा और रेरा पंजीकरण के बाद नियमानुसार निर्माण कार्य शुरू किया गया है। परियोजना के तहत करीब 150 से 200 परिवारों ने घर खरीदने के लिए पंजीयन कराया है, जिन्हें तय समय सीमा में मकान देना अनिवार्य है। इस योजना में कमजोर और निम्न आय वर्ग से लेकर मध्यम आय वर्ग तक के हितग्राही शामिल हैं।

मंडल के उपाध्यक्ष आर.के. राठौर ने बस्तीवासियों के आरोपों को भ्रामक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित क्षेत्र में केवल 18 घर ही अतिक्रमण की जद में आते हैं। 57 घर तोड़े जाने की बात को उन्होंने गलतफहमी करार दिया। उनके अनुसार सीमांकन के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया है और 18 घरों का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। कोर्ट के आदेश के बिना किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी।

दूसरी ओर, बस्तीवासियों का कहना है कि सरकारी योजना की आड़ में उनके सालों पुराने घर तोड़े जा रहे हैं और उन्हें उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। प्रभावितों का दावा है कि वर्ष 1998 में उन्हें आवासीय पट्टा दिया गया था, जिसके बाद कई परिवारों ने अपने सीमित संसाधनों से मकान बनाए। वर्ष 2015 में यहां 25 से 30 सीटों वाला सुलभ शौचालय भी बना था, जिसे अब निर्माण कार्य के लिए तोड़ा जा रहा है।

पीड़ितों का कहना है कि यह मैदान बस्ती के बच्चों के खेलने का एकमात्र स्थान है। यहीं साप्ताहिक बाजार और मंदिर भी स्थित हैं। कुछ दिन पहले केंद्रीय शहरी आवास राज्य मंत्री तोखन साहू ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “किसी भी गरीब परिवार को वंचित नहीं किया जाएगा”, लेकिन बस्तीवासियों के अनुसार अब 57 घरों को तोड़ने की तैयारी मंत्री के बयान के विपरीत है।

सर्व समाज संस्था रूआबांधा एवं महिला संगठनों की ओर से मांग की गई है कि सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे, नोटिस वापस ले और यथास्थिति बनाए रखे। बस्तीवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

गृह निर्माण मंडल के अनुसार, रूआबांधा मैदान में प्रस्तावित योजना के तहत 3.75 एकड़ भूमि पर कुल 321 यूनिट बनाए जाने हैं, जिनमें 280 आवासीय और 41 व्यावसायिक परिसर शामिल हैं। इस परियोजना को 2 से 3 वर्षों में पूरा कर हितग्राहियों को सौंपने का लक्ष्य है। फिलहाल बैरिकेडिंग कर निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है।

इस पूरे मामले ने प्रशासन और बस्तीवासियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ सरकार की आवासीय योजना है, तो दूसरी ओर वर्षों से बसे गरीब परिवारों के उजड़ने का डर। अब सबकी नजर न्यायालय के आदेश और सरकार के अगले कदम पर टिकी

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