छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बार फिर किसानों की परेशानी को उजागर करने वाली गंभीर घटना सामने आई है। मंगलवार को हरदी बाजार तहसील कार्यालय के सामने एक किसान ने आत्महत्या के इरादे से ज़हर पी लिया। किसान की हालत बिगड़ने पर मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल प्रशासन और परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद उसे प्राथमिक इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया, जहां उसका इलाज जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित किसान की पहचान 60 वर्षीय बैसाखू मरकाम के रूप में हुई है, जो झर्रा गांव का निवासी है। किसान के पास करीब 3 एकड़ 27 डिसमिल कृषि भूमि है, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में जमीन का रकबा कम दर्ज होने के कारण वह अपेक्षित मात्रा में धान नहीं बेच पा रहा था। अब तक वह केवल 15 क्विंटल धान ही बेच सका, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
रिकॉर्ड सुधार कराने के लिए किसान पिछले कई दिनों से तहसील कार्यालय और संबंधित अधिकारियों के चक्कर काट रहा था। आरोप है कि पटवारी से लेकर तहसील कार्यालय तक गुहार लगाने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। बार-बार प्रयासों के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो किसान मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया।
मंगलवार दोपहर वह एक बार फिर हरदी बाजार तहसील कार्यालय पहुंचा और कुछ ही देर बाद कार्यालय के सामने ज़हर पी लिया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस भी मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना जिले में 24 घंटे के भीतर किसानों से जुड़ी दूसरी ऐसी गंभीर घटना बताई जा रही है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किसानों की समस्याओं के समाधान में इतनी देरी क्यों होती है और उन्हें अपनी जायज़ मांगों के लिए ऐसे कदम उठाने पर क्यों मजबूर होना पड़ रहा है।
