सूरजपुर जिले के एक रेस्ट हाउस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बार गर्ल के कथित अश्लील डांस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मामले में कृषि मंत्री रामविचार नेताम के बयान ने विवाद को और तूल दे दिया है। मंत्री नेताम ने कहा कि कला को केवल धार्मिक जप तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त होती है। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
मंत्री नेताम ने मीडिया से बातचीत में सवाल उठाया कि यदि किसी रेस्ट हाउस में किसी प्रकार की प्रस्तुति दी जा रही है, तो वहां जाकर वीडियो रिकॉर्ड करने की आवश्यकता किसने बताई। उनका कहना था कि कला का स्वरूप व्यापक होता है और उसे संकीर्ण दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों को कला कहना भारतीय और विशेषकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा की सोच को दर्शाता है, न कि प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के कार्यक्रम सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं।
वहीं, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने भी इस पूरे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो भले ही पुराना हो, लेकिन इस तरह की गतिविधियां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति इस प्रकार की नहीं है और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई है। घटना के बाद डिप्टी रेंजर और महिला फॉरेस्टर को निलंबित किया गया है, जबकि तत्कालीन रेंजर को नोटिस जारी किया गया है।
इधर, गरियाबंद जिले के उधर क्षेत्र में ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम के दौरान हुए अश्लील डांस के एक अन्य मामले में पुलिस ने ओडिशा की एक डांसर को उसके गांव से गिरफ्तार किया है। डांसर को धर्मशाला थाने में पेश करने के बाद निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में आयोजकों के खिलाफ दर्ज FIR में डांसर को सह-आरोपी बनाया है और एक अन्य डांसर की तलाश जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कला, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि मनोरंजन और मर्यादा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि कला की स्वतंत्रता भी बनी रहे और सामाजिक मूल्यों की रक्षा भी हो सके।
