कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में भारत ने ईरान स्थित चाबहार पोर्ट से अपना प्रभावी नियंत्रण कमजोर कर दिया। पार्टी का दावा है कि इस फैसले से भारत के करीब ₹1100 करोड़ के निवेश पर संकट खड़ा हो गया है और देश के रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चाबहार पोर्ट भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का अहम रास्ता है। इस परियोजना के जरिए भारत पाकिस्तान को बायपास करते हुए व्यापार और रणनीतिक पहुंच मजबूत कर सकता था। आरोप है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और ट्रम्प प्रशासन के दबाव में भारत सरकार पीछे हटती नजर आई।
वहीं, विदेश मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि भारत ने न तो चाबहार पोर्ट से नियंत्रण छोड़ा है और न ही परियोजना से खुद को अलग किया है। सरकार के मुताबिक, भारत अभी भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है और संचालन से जुड़ी व्यवस्थाएं जारी हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका से मिली प्रतिबंध छूट (waiver) फिलहाल प्रभावी है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां कांग्रेस इसे भारत की विदेश नीति की विफलता बता रही है, वहीं सरकार का दावा है कि चाबहार पोर्ट को लेकर देश के दीर्घकालिक रणनीतिक हित सुरक्षित हैं और किसी भी तरह का निवेश व्यर्थ नहीं गया है।
